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‘मैत्री’ से 2018 में शुरू होगी बांग्लादेश को बिजली आपूर्ति

Tue, 28 Oct 2014 09:37 AM IST
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
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भारत और बांग्लादेश के साझा उपक्रम के रूप में स्थापित किए जा रहे 1,320 मेगावाट क्षमता के मैत्री सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की 266 मेगावाट की पहली यूनिट दिसंबर 2018 तक शुरू कर दी जाएगी। यह विद्युत परियोजना भारत और बांग्लादेश के बीच बिजली के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर हुए करार के तहत लगाई जा रही है।
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इस परियोजना की स्थापना का काम भारत सरकार की बिजली उत्पादक कंपनी नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) और बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (बीपीडीबी) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इसके अलावा बांग्लादेश को त्रिपुरा स्थित 726.6 मेगावाट क्षमता के पलताना परियोजना से भी 100 मेगावाट बिजली की आपूर्ति चाहता है। दोनों देशों की सरकारें बिजली की बेहतर आपूर्ति के लिए क्षेत्र में एक रेडियल इंटरकनेक्शन विकसित करना चाहती है। इसके तहत दोनों देशों के बीच त्रिपुरा में पावर इंटर कनेक्शन का स्टार्टिंग प्वाइंट स्थापित करने को लेकर एक साझा तकनीकी समिति (जेटीसी) का गठन भी किया गया है।

दोनों ही देशों प्वाइंट ऑफ कनेक्टिविटी और इंटरकनेक्शन की विभिन्न प्रणालियों को लेकर अपने-अपने स्तर पर अध्ययन कर चुके हैं और इस बारे में जेटीसी की ओर से तैयार रिपोर्ट का भी अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट में प्वाइंट ऑफ कनेक्टिविटी की स्थापना और इंटरकनेक्शन के प्रकार और उसके विभिन्न विकल्पों को लेकर भारत द्वारा किए गए अध्ययन को शामिल किया गया है।
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इसके अलावा इसमें बांग्लादेश के दक्षिण कोमिला में 100 मेगावाट के लोड को भारतीय बिजली प्रणाली से बांग्लादेश के पावर सिस्टम को हस्तांतरित करने को लेकर बांग्लादेश की ओर से किए गए अध्ययन को भी शामिल किया गया है। जेटीसी की इस रिपोर्ट को विदेश मंत्रालय के जरिए बांग्लादेश को भी सौंप दिया गया है।

भारत से बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति पहले ही शुरू की जा चुकी है। बांग्लादेश को दी जाने वाली बिजली की आपूर्ति को बढ़ाने के लिए जरूरी कामों को भी किया जा रहा है। इसके तहत भारत के बहरामपुर और बांग्लादेश के बहरामारा स्थित एचवीडीसी स्टेशन की क्षमता बढ़ा कर 500 मेगावाट बिजली के हस्तांतरण करने की योजना है। इसके अलावा पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल) की भारत और बांग्लादेश के बीच 400 केवी की एक ट्रांसमिशन लाइन शुरू करने की भी योजना है।

इसके जरिए एनटीपीसी के पावर स्टेशनों में उत्पादित बिजली को 500 मेगावाट की पूरी क्षमता के साथ बिना किसी बाधा के बांग्लादेश तक पहुंचाया जा सकेगा। इस दूसरी लाइन को शुरू करने का फैसला गर्मियों के दिनों में शाम के वक्त बिजली की ज्यादा खपत होने के दौरान आपूर्ति में आने वाली बाधा को देखते हुए लिया गया है।

इसे देखते हुए ही 400 केवी की सागरदीघी-बीहरामपुर डीसी लाइन को उच्च क्षमता लाइन के रूप में स्थापित करने का निर्णय किया गया और प्राथमिकता के आधार पर इसके काम को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस लाइन के दिसंबर 2014 तक चालू हो जाने की उम्मीद है। इस लाइन के चालू हो जाने के बाद भारत से बांग्लादेश को 500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति में कोई समस्या नहीं रह जाएगी।

बीपीडीपी ने बांग्लादेश को 50 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति के लिए किसी भारतीय एजेंसी का चयन करने को कहा है। भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों और बांग्लादेश के बीच बिजली के स्थानांतरण की संभावनाओं का पता लगाने के लिए भी एक संयुक्त तकनीकी दल (जेटीटी) का गठन किया गया है। इसके तहत रंगिया-रोवता और बारापुकुरिया-जमालपुर में 500 और 1000 मेगावाट के एचवीडीसी स्टेशन स्थापित किए जाने हैं।
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