उद्योग संगठन एसोचैम ने सरकार को सुझाव दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रद्द किए गए कोल ब्लॉकों के दोबारा आवंटन में ऐसे कैप्टिव ब्लॉक आवंटियों को प्राथमिकता दी जाए, जिनकी परियोजनाएं चल रही हैं या जल्द ही चालू होने की स्थिति में हैं। अन्य आवंटियों के लिए नीलामी इन परियोजनाओं के लिए ब्लॉक आवंटित कर कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद ही की जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को लिखे एक पत्र में एसोचैम ने कहा है कि स्टील संयंत्रों को आवंटित किए जाने वाले कोल ब्लॉकों की नीलामी केवल स्टील संयंत्रों के लिए की जानी चाहिए। इसी तरह बिजली संयंत्रों के लिए सुरक्षित ब्लॉकों की नीलामी केवल बिजली संयंत्रों के लिए की जानी चाहिए।
ब्लॉकों के लिए रिजर्व मूल्य और अग्रिम भुगतान (अपफ्रंट पेमेंट) की राशि का निर्धारण सीएमपीडीआईएल या एमईसीएल के आकलन के अनुरूप ब्लॉकों में वास्तविक आधार पर खनन कोयले के भंडार के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि भूगर्भीय सर्वेक्षण में बताए गए कोयला भंडार के आधार पर।
इसके अलावा एसोचैम ने मौजूदा कोल ब्लॉकों के लिए दी गई मंजूरियों को इन ब्लॉकों के नए आवंटियों को स्वत: ही हस्तांतरित करने की बात भी सरकार से कही है। ऐसा इसलिए करने का सुझाव दिया गया है कि नए आवंटियों को अगर फिर से यह मंजूरियां लेनी पड़ीं तो इन कोल ब्लॉकों से कोयले का उत्खनन शुरू करने में देरी होगी, जिसके चलते उन परियोजनाओं का काम भी लटक जाएगा, जिन्हें चलाने में इस कोयले का इस्तेमाल किया जाना है।
कोल ब्लॉकों के मूल आवंटियों को दिए जाने वाले हर्जाने के बारे में एसोचैम ने सुझाव दिया है कि इसका निर्धारण 2013 के भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम और कोल ब्लॉक में किए गए अन्य कामों के बाजार मूल्य आधारित खर्च के अनुरूप किया जाना चाहिए।
एसोचैम ने कहा है कि नीलामी प्रक्रिया में मौजूदा आवंटियों को पहले इनकार के अधिकार का पालन करते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। कोल ब्लॉकों पर 295 रुपये प्रति मीट्रिक टन की पेनाल्टी की दर को एसोचैम ने अनुचित बताते हुए कहा है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने यह दर कोल इंडिया के सभी ग्रेड के कोयलों के भंडारों के (1,028 रुपये प्रति टन) आधार पर और 2010-11 में कोल इंडिया की औसत लागत के आधार पर तय की थी, जबकि आवंटित किए जाने वाले कोल ब्लॉकों में मिलने वाले कोयले की क्वालिटी इससे काफी कमतर स्तर की है।