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छह माह में पटरी पर आ जाएगी अर्थव्यवस्था: मोंटेक

Mon, 15 Oct 2012 07:39 PM IST
मुंबई/एजेंसी
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योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा है कि पिछली कई तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट का सिलसिला थम गया है और अर्थव्यवस्था अगले छह महीने में पटरी पर आ जाएगी।
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यहां एक बैंकिंग सम्मेलन में अहलूवालिया ने कहा कि हम यह उम्मीद करते हैं कि निवेशकों को भरोसा बहाल करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों से दूसरी छमाही में देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। मोंटेक ने कहा कि चालू वर्ष के पहले छह महीनों में जीडीपी वृद्धि दर करीब 5.5 प्रतिशत रही है। दूसरी छमाही में यह 6 फीसदी के आसपास रह सकती है।

अगस्त के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों में सुधार और हाल ही में पीएमआई के सर्वेक्षण के आधार पर अहलूवालिया ने कहा कि इससे अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। सरकार फिर से सुधारात्मक उपाय करने की तैयारी मूड में है। इसलिए, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में मामूली सुधार के आधार पर यह कहना चाहूंगा कि गिरावट का दौर थम चुका है।
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हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि अर्थव्यवस्था में तेजी का दौर शुरू हो गया है, लेकिन सरकार ने जो आर्थिक सुधार के कदम उठाए हैं उनका असर आगे दिखाई देगा। पिछले कई महीनों की सुस्ती के बाद अगस्त माह में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 2.7 फीसदी दर्ज की गई है। हालांकि, अप्रैल-अगस्त की अवधि में आईआईपी की रफ्तार करीब 0.4 फीसदी ही रही। पिछले साल की समान अवधि में यह रफ्तार 5.6 फीसदी थी।

नीतिगत सुधार में देरी के लिए गठबंधन को भी दोषी ठहराते अहलूवालिया ने कहा कि हमने सुधारात्मक उपाय करने में काफी समय लिया, इसकी वजह गठबंधन का दबाव था। उन्होंने आर्थिक गिरावट के लिए ग्लोबल मंदी को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती केवल अंतरराष्ट्रीय वजहों से ही नहीं है, बल्कि इसके लिए घरेलू कारण भी जिम्मेदार हैं।

भारत की नकारात्मक तस्वीर न पेश करें रेटिंग एजेंसियां
योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा है कि रेटिंग एजेंसियों को भारत की नकारात्मक तस्वीर पेश नहीं करनी चाहिए। अहलूवालिया ने यहां एक बैंकिंग सम्मेलन में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इन रेटिंग एजेंसियों के पास देश की अर्थव्यवस्था से जुडे़ ऐसे नकारात्मक आंकडे़ हैं, जिसके आधार पर यह देश की क्रेडिट रेटिंग को घटाने की चेतावनी देती रहती हैं।

उन्होंने कहा कि अगर इन आंकड़ों के आधार पर ही यह एजेंसियां रेटिंग बढ़ाती या घटाती हैं, तो क्या वह भारतीय अर्थव्यवस्था का सही आकलन करने की स्थिति में है, और यदि ऐसा होता है तो क्या वह अर्थव्यवस्था की ऋण साख बढ़ाएंगी।

अहलूवालिया ने कहा कि रेटिंग एजेंसियां चार महीने पहले मिले आंकड़ों के आधार पर आगे के पूर्वानुमान जताने लगती हैं, उन्हें चाहिए कि वह हर समय अपने पास ताजा आंकडे़ रखें और उसके आधार पर ही साख निर्धारण का काम करें।
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