सुप्रीम कोर्ट द्वारा 214 कोल ब्लॉकों को निरस्त किए जाने के बाद कोल क्षेत्र में हालात जल्द सामान्य बनाने और अनिश्चितता को दूर करने के इरादे से कोयला एवं ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने अंतर मंत्रालयी परिषद (आईएमसी) के गठन को मंजूरी दे दी। आईएमसी कोल ब्लॉकों के लिए निविदा जारी करने सहित विभिन्न विकल्प तलाशेगा और शीर्ष अदालत के आदेश से लगे झटके से उबरने का रास्ता सुझाएगा।
आईएमसी की अगुवाई अतिरिक्त कोल सचिव करेंगे और इसमें ऊर्जा, स्टील, वित्त, कोयला, कानून मंत्रालयों और औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के प्रतिनिधि शामिल होंगे। परिषद् राज्य सरकारों, केंद्र सरकार के विभागों, सरकारी कंपनियों और उद्योग संघों सहित सभी हितधारकों से विस्तृत परामर्श करेगा। आईएमसी को 30 अक्तूबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
कोयला मंत्रालय में कई लोगों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने कोल ब्लॉकों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश दिया होता, तो इससे बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो सकता था। खनन गतिविधियों को मार्च 2015 तक बरकरार रखने के अनुमति से कोल इंडिया को टेकओवर या सरकार को ब्लॉकों की नीलामी के लिए पर्याप्त समय मिल गया है। अदालत ने इसके जरिए ऊर्जा जैसे प्रमुख सेक्टरों को कम से कम दिक्कतें हो, यह सुनिश्चित किया है।
तत्काल प्रभाव से कोल ब्लॉकों को निरस्त करने से कई बिजली, स्टील और सीमेंट परियोजनाओं को तगड़ा झटका लग सकता था, जो कि निरस्त की गई खदानों पर निर्भर थे और इनमें कंपनियां कुल 2.86 लाख करोड़ रुपये निवेश कर चुकी हैं।
माना जा रहा है कि आईएमसी का गठन त्वरित आधार पर इस संकट का समाधान करने की दिशा में उठाया गया कदम है। निजी या सरकारी कंपनियों को कोयला खदानों की नीलामी या हैंड ओवर करने की पूरी प्रक्रिया में कम से कम छह महीने का समय लगने की उम्मीद है। हालांकि, सरकार ने नीलामी प्रक्रिया जल्द, पारदर्शी और नए सिरे से कराने की अपनी तत्परता दर्शाई है।