भारतीय उद्योग संगठनों ने औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोतरी को उत्साहवर्धक बताया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि अक्तूबर 2012 में आईआईपी का आंकड़ा उत्साहवर्धक और उम्मीद से अधिक रहा है। लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हर साल त्योहारी सीजन से पहले आईआईपी में उछाल आता है और बाद में गिरावट होती है। इसलिए, अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि अर्थव्यवस्था में बड़ा सुधार आ रहा है। सीआईआई का कहना है कि रिजर्व बैंक को जनवरी से ब्याज दरें घटाने की शुरुआत कर देनी चाहिए।
एसोचैम के अध्यक्ष राजकुमार धूत का कहना है अक्तूबर में औद्योगिक उत्पादन में आए सुधार से घरेलू औद्योगिक गतिविधियों के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद जगती है। अच्छी बात यह है कि विनिर्माण क्षेत्र में 9.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। लेकिन आरबीआई को मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान आईआईपी के ताजा आंकड़े को बहुत महत्व न देते हुए औद्योगिक भरोसा वापस लाने के लिए ब्याज दरों में कमी करनी चाहिए।
आईसीआईसीआई सिक्युरिटीज के अर्थशास्त्री ए. प्रसन्ना का कहना है कि आईआईपी के आंकड़ों को सावधानी से समझना होगा। नवंबर में कारों की बिक्री उत्साहजनक नहीं रही है, जिसका असर नवंबर के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों में नजर आ सकता है।