डेबिट और क्रेडिट कार्ड ने जहां लोगों के रोजमर्रा के जीवन को काफी आसान बना दिया है। वहीं, इन कार्डों से होने वाली धोखाधड़ी की फेहरिस्त भी लंबी होती जा रही है और डेबिट कार्ड धोखाधड़ी के मामले में भारत दुनिया में दूसरे पायदान पर है।
शोध सलाह देने वाली एजेंसी एसीआई वर्ल्डवाइड की रिपोर्ट के मुताबिक 2013 में देश में डेबिट कार्ड धोखाधड़ी की दर 32 फीसदी रही, जबकि वर्ष 2012 में यह 21 फीसदी रही थी। पिछले पांच वर्षों में पूरी दुनिया में चार में से एक उपभोक्ता इस तरह की धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं।
2400 से ज्यादा लोगों को गया ठगा
बीस देशों के 6,100 से अधिक डेबिट, क्रेडिट और प्रीपेड कार्ड उपभोक्ताओं के सर्वेक्षण में भारत के 41 फीसदी उपभोक्ताओं ने पिछले पांच वर्षों में उनके साथ धोखाधड़ी होने की बात मानी है, जबकि 2012 में 37 फीसदी लोगों ने ऐसी धोखाधड़ी की बात स्वीकार की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में पूरी दुनिया में संयुक्त अरब अमीरात पहले स्थान है और उसके बाद चीन, भारत और अमेरिका का स्थान है।
साल 2013 में घटी 1,367 घटनाएं
रिपोर्ट में 28 फीसदी भारतीयों ने कहा कि ऐसी धोखाधड़ी की वजह से ही उनके बैंक ने पिछले वर्षों में उन्हें केवल एक बार ही डेबिट, क्रेडिट और प्रीपेड कार्ड भेजा है।
अकेले 2013 में धोखाधड़ी की 1,367 घटनाएं सामने आई हैं। रिपोर्ट में देश के 34 फीसदी उपभोक्ताओं का कहना है कि कार्डों की धोखाधड़ी के मद्देनजर वित्तीय संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुरक्षा से वे खुश नहीं है।
बैंकों की निष्क्रियता की वजह से 58 फीसदी उपभोक्ताओं ने अपना अकाउंट दूसरे बैंकों में खुलवाने की बात कही है।