ज्वेलरी बेचने के लिए किस्त के रुप में चलाई जा रही स्कीमों में ग्राहकों की 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा है। नए कंपनी कानून के तहत स्कीम को अवैध माने जाने के बाद देश भर में चलाई जा रही स्कीम को कंपनियों ने बंद कर दिया है।
ग्राहकों की रकम लौटाने की कवायद भी टाटा समूह ने शुरू कर दी है। इसके तहत तनिष्क करीब 1,000 करोड़ रुपये राशि लौटाएगा। हालांकि अभी दूसरी कंपनियों ने रकम लौटाने के संबंध में कोई पहल नहीं की है।
किस्तों में ज्वैलरी खरीदने की थी योजना
ईएमआई स्कीम के तहत ज्वेलरी निर्माता कंपनियां ग्राहकों को 12 किस्तों में रकम चुकाकर ज्वेलरी खरीदने का विकल्प देती है। जिसमें 11 किस्त चुकाए जाने पर एक किस्त का डिस्काउंट भी मिलता है।
कंपनी मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कंपनी कानून के तहत इस स्कीम से ग्राहकों को 12 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न मिल रहा है। जो कि गैर कानूनी है।
साथ ही स्कीम के जरिए जुटाई गई राशि कंपनी के नेटवर्थ की तुलना में 25 फीसदी से ज्यादा होने पर भी यह स्कीम अवैध हो जाती है। जो भी कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करेगी, उस कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एक बढ़िया कारोबार बन चुका
ज्वेलरी इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक देश की सभी प्रमुख ज्वेलरी कंपनियां इस स्कीम को चला रही है। संगठित क्षेत्र में किस्त के जरिए ज्वेलरी बेचना एक बड़ा कारोबार बन चुका है।
अनुमान के अनुसार यह कारोबार 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। इंडस्ट्री इस संबंध में वित्त मंत्री अरूण जेटली से भी मिलने की तैयारी कर रही है। वह नए कंपनी कानून के तहत लागू प्रावधान की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग करेगी।
क्या है मामला?
एक अप्रैल 2014 से लागू किए गए नए कंपनी कानून के तहत ज्वेलरी खरीदने के लिए किस्त के आधार पर शुरू की गई स्कीम, पब्लिक डिपॉजिट में आएगी।
रिटर्न ज्यादा होने और कंपनियों के कुल कारोबार में स्कीम का हिस्सा अधिक होने से यह स्कीम गैर कानूनी है। इसी के कारण कंपनियों ने स्कीम को बंद कर दिया है। अब कंपनियां नए सिरे से स्कीम को लागू करने पर भी विचार कर रही हैं।