सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंटरनेशनल कोल वेंचर्स लिमिटेड (आईसीवीएल) ने वर्ष 2009 में अपनी स्थापना के बाद पहली बार कोई विदेशी अधिग्रहण किया है। आईसीवीएल मोजांबिक में खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रियो टिंटो की कोयला खदान खरीदने का फैसला किया है। इसके लिए कंपनी ने गत 28 जुलाई को रियो टिंटो के साथ 5 करोड़ डॉलर (करीब 300 करोड़ रुपये) का करार किया है।
आईसीवीएल से मिली जानकारी के अनुसार, मोजांबिक की ये ऑपरेटिंग माइंस रियो टिंटो ने वर्ष 2011 में खरीदी थी। तब से इनमें कोयले का उत्पादन जारी है। यहां करीब 2.6 अरब टन कोयले के भंडार मौजूद हैं, जिसमें अधिकांश हार्ड कुकिंग और थर्मल कोल है। रियो टिंटो की खान केअधिग्रहण के लिए आईसीवीएल के सीईओ अजय माथुर और रियो टिंटो के निदेशक (विलय व अधिग्रहण) जॉर्ज हार्टले के बीच गत 28 जुलाई को दिल्ली में एक समझौता किया गया है।
देश में कोयले की जरूरत को पूरा करने के लिए मोजांबिक में आईसीवीएल का यह अधिग्रहण काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। मोजांबिक का यह कोयला क्षेत्र ऑस्ट्रेलिया के बाद विश्व का सबसे प्रमुख कोयला उत्पादन क्षेत्र माना जाता है। रियो टिंटो के साथ हुए समझौते के मौके पर सेल और आईसीवीएल के चेयरमैन सीएस वर्मा ने कहा कि कंपनी के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम है। इससे स्टील कंपनियों और देश में कोयले की जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी। मोजांबिक ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले भारत से नजदीक है, जिसका फासदा सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनियों को पहुंचेगा।
इस समझौते के तहत मोजांबिक में रियो टिंटो के बेंगा माइंस में आईसीवीएल को 65 फीसदी और जेंबेज माइंस में 100 फीसदी हिस्सेदारी मिलेगी। बेंगा में बाकी हिस्सा टाटा स्टील के पास है। लंबे समय से कोयला संसाधनों की तलाश में जुटी आईसीवीएल केलिए अब स्टील उद्योग को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।