आयकर विभाग ने फिनलैंड की मोबाइल हैंडसेट निर्माता कंपनी नोकिया को करीब 2,100 करोड़ रुपये की टैक्स वसूली के लिए नोटिस भेजा है।
नोकिया ने आयकर विभाग से मिले नोटिस की पुष्टि करते हुए कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट से उसे स्टे मिल गया है। हालांकि, कंपनी ने नोटिस में मांगी गई रकम का खुलासा नहीं किया है।
आयकर विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नोकिया से 2,100 करोड़ रुपये का बकाया टैक्स वसूलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भुगतान के लिए कंपनी को पांच दिन का समय दिया गया है। जिस पर हाईकोर्ट ने विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है।
इस मामले पर नोकिया की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वह भारतीय कानूनों और भारत सरकार व फिनलैंड के बीच हुई टैक्स संधियों का पूरी तरह पालन कर रही है। आयकर विभाग की ओर से उसे एक आदेश प्राप्त हुआ है।
इस मामले में कंपनी ने पिछले सप्ताह दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। गत शुक्रवार को अदालत ने आयकर विभाग को नोटिस जारी करते हुए नोकिया के खिलाफ अगले आदेश तक टैक्स वसूली पर रोक लगा दी है।
उधर, आयकर विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नोकिया इंडिया की ओर से टैक्स काटे बगैर (टीडीएस) करीब 17 हजार करोड़ रुपये रॉयल्टी के तौर पर मुख्य कंपनी को भेजने का मामला पकड़ में आया है।
गत जनवरी में नोकिया की चेन्नई के नजदीक फैक्ट्री और गुड़गांव में कई ठिकानों पर हुई छानबीन के बाद विभाग ने करीब 2,300 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी है। इसमें से करीब 2,100 करोड़ रुपये की वसूली का नोटिस भेजा जा चुका है, जबकि 200 करोड़ रुपये का एक और नोटिस जल्द ही भेजा जाने वाला है।
विभाग के टैक्स नोटिस पर हाईकोर्ट के स्टे के बाबत आयकर अधिकारियों का कहना है कि आमतौर पर ऐसे मामला में टैक्स जमा करने के लिए 30 दिन का समय दिया जाता है। लेकिन नोकिया मामले की गंभीरता को देखते हुए नियमानुसार सिर्फ 5 दिन का समय दिया है। इसके खिलाफ नोकिया ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट ने वसूली पर स्टे सिर्फ आयकर विभाग का जवाब मिलने तक लगाया है।
वोडाफोन, कैडबरी के बाद नोकिया का नंबर
विदेशी कंपनियों की कर चोरी को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। वोडाफोन पर करीब 11,200 करोड़ रुपये की टैक्स वसूली का मामला अभी तक नहीं सुलझा है। जबकि, हाल ही में कैडबरी और नोकिया को नोटिस थमाकर आयकर विभाग ने विदेशी कंपनियों को चौंका दिया है। कैडबरी को छोड़कर यह तीनों मामले ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े हैं। यानी, समूह की एक कंपनी से दूसरी कंपनी या इकाई को हस्तांतरित होने वाले मुनाफे में टैक्स बचाने की कोशिश से जुड़े हैं।