विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने कहा है कि वह अपनी निजी संपत्ति का 25 फीसदी अधिक हिस्सा चैरिटी के लिए दे चुके हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि अच्छी तरह परोपकार में इन पैसों का इस्तेमाल आसान नहीं है।
प्रेमजी ने कहा कि मेरा साफ तौर पर मानना है मैं दान करने का इरादा रखता हूं और मैंने पहले ही अपनी निजी संपत्ति का 25 फीसदी दान कर दिया है। लेकिन कई बार दान की गई राशि की परोपकार के कार्यों में अच्छी तरह इस्तेमाल कर पाना मुश्किल होता है।
विप्रो का मुनाफा 16.73% बढ़ा
देश की दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो के मुनाफे में जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान 16.73 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बीते वर्ष की आखिरी तिमाही में कंपनी ने 1,728.7 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया।
इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 1,480.9 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। बीती तिमाही के दौरान कंपनी की समेकित सकल आय 13 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 9,613.1 करोड़ रुपये रही। इससे पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 8,506.1 रुपये रही थी।
सालाना नतीजों की बात करें तो, वित्त वर्ष 2012-13 में कंपनी का सालाना शुद्ध लाभ 19.07 फीसदी बढ़कर 6,635.9 करोड़ रुपये रहा, जोकि वित्त वर्ष 2011-12 में 5,573 करोड़ रुपये था।
कंपनी की कुल आय वित्त वर्ष के दौरान 17 फीसदी बढ़कर 37,685.1 करोड़ रुपये रही, जोकि 32,205.5 करोड़ रुपये रही। आईटी, कंज्यूमर केयर, लाइटिंग व अन्य कारोबारों को मिलाकर बीती तिमाही के दौरान विप्रो की कुल आय 11.72 फीसदी बढ़कर 11,026.4 करोड़ रुपये रही।
गौरतलब है कि नवंबर 2012 में विप्रो ने अपने कंज्यूमर केयर, लाइटिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग व मेडिकल डाइग्नोस्टिक कारोबार को अलग (डीमर्ज) करने विप्रो इंटरप्राइजेज नाम से गैरसूचीबद्ध कंपनी के तहत किए जाने की घोषणा की थी।
दूसरी ओर विप्रो लिमिटेड को आईटी सेवाओं व उत्पादों वाली एक सूचीबद्ध कंपनी के रूप में बनाए रखा गया। कंपनियों के ढांचे में यह बदलाव 31 मार्च 2013 से प्रभाव में आ गया है।
कंपनी के चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने कहा कि अपने विविध कारोबारों को अलग करके हमने विप्रो को मुख्य रूप से टेक्नॉलजी पर केंद्रित कंपनी के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। 31 मार्च से इसके प्रभाव में आ जाने के बाद उम्मीद है कि विप्रो के कारोबार में इससे एक नई रफ्तार पाई जा सकेगी।