एचएसबीसी बैंक आतंकवादियों और ईरान तक अवैध धन को पहुंचाने के मामले को रफादफा करने के लिए अमेरिका के सरकारी निकायों को 1.92 अरब डॉलर देने पर राजी हो गया है। बैंक ने इस बारे में एक बयान जारी करते हुए बताया है कि मनी लांड्रिंग संबंधी प्रावधानों के उल्लंघन के मामले को निपटाने के लिए उसके और अमेरिकी निकाय के बीच सहमति बन गई है।
अमेरिका के न्याय विभाग के साथ हुए इस करार में एचएसबीसी में इस मामले में पूरा सहयोग करने का वायदा किया है। एचएसबीसी समूह के सीईओ स्टुअर्ट गुलीवन ने कहा कि हम अतीत में हुई अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेते हैं। इसके अलावा हमने इन पर खेद जताते हुए ऐसी चूक भविष्य में दोबारा न होने का भी भरोसा दिलाया है।
गौरतलब है कि जुलाई में अमेरिक प्रशासन ने एचएसबीसी पर प्रतिबंधित देश ईरान, आतंकवादियों और ड्रग्स के काले कारोबार से जुड़े लोगों को अमेरिकी अर्थतंत्र में पहुंच बनाने और उन तक धन पहुंचाने का आरोप लगाया था। इस मामले में बैंक ने काले धन पर रोक संबंधी कानूनी प्रावधानों का सही ढंग से पालन न कर पाने पर क्षमा याचना की थी। इस मामले में बैंक के कुछ आला अधिकारियों को इस्तीफे भी देने पड़े थे, जिनमें समूह के कंप्लाइंसेज प्रमुख डेविड बाग्ले भी शामिल थे। इससे पहले नवंबर में भी एचएसबीसी अमेरिका को 1.5 अरब डॉलर का जुर्माना दे चुका है।