पांच लाख रुपये तक के होम लोन लेना अब आसान होने वाला है। बैंक अब निम्न आय वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को बिना किसी गारंटी के कर्ज दे सकेंगे।
रिजर्व बैंक के नए नियमों के बाद बैंकों के लिए इस तरह के कर्ज पर किसी तरह का जोखिम भी नहीं होगा। ऐसे में बैंक पांच लाख रुपये तक के होम लोन को देने में ज्यादा तरजीह देंगे। जिसका सीधा फायदा कम आय वर्ग के तबके को होम लोन मिलने में होगा।
मौजूदा नियमों के तहत एक लाख रुपये की सालाना आय वाले लोग आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग और दो लाख रुपये की सालाना आय वाले निम्न आय वर्ग के तहत आते हैं।
केंद्र सरकार ने ऐसे वर्ग को कर्ज आसानी से मिलने के लिए क्रेडिट रिस्क गारंटी फंड ट्रस्ट का गठन किया है, जिसके तहत कर्ज लेने वाले के बदले में बैंकों को ट्रस्ट के जरिए गारंटी की निश्चित राशि दी जानी है।
बैंक इस वर्ग को ज्यादा कर्ज दें, इसके लिए रिजर्व बैंक ने रिस्क वेटेज और प्रोविजनिंग के नियमों में भी राहत दे दी है। बैंक रिस्क वेटेज के जरिए किसी कर्ज के जोखिम को आंकने के साथ-साथ डिफॉल्ट पर कर्ज की राशि के आधार पर प्रोविजनिंग तय करते हैं। जिसकी वजह से उनके लाभ पर प्रतिकूल असर होता है।
रिजर्व बैंक ने नए नियमों के बाद इस तरह के कर्ज पर बैंकों का रिस्क वेटेज शून्य होगा, साथ ही उनको डिफॉल्ट होने पर प्रोविजनिंग नहीं करनी होगी। ऐसे में बैंकों के लिए पांच लाख रुपये तक के होम लोन पर कोई जोखिम नहीं होगा। जिसकी वजह से योजना के दायरे में आने वाले लोगों को आसानी से कर्ज मिल सकेगा।