आवासीय क्षेत्र में आई सुस्ती को दूर करने के लिए पीएचडी चैम्बर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने सरकार से होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर कर छूट की वर्तमान 2 लाख की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग की है। इससे जहां मकान खरीदने वालों को राहत मिलेगी वहीं आवासीय क्षेत्र को भी फायदा होगा। संगठन के
मुताबिक आयकर मद में छूट बढ़ाने से सरकार के खजाने में कम रकम नहीं आएगी क्योंकि दूसरी तरफ से उनकी झोली भरेगी। पीएचडीसीसीआई के नए अध्यक्ष महेश गुप्ता ने यहां मंगलवार को संवाददाताओं के साथ बातचीत में बताया कि इससे ईएमआई में कमी होगी और लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा बचेगा।
यही नहीं, यदि सरकार ऐसा करती है तो इससे रीयल एस्टेट सेक्टर में निवेश बढ़ाने में मदद भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि होम लोन की सर्विसिंग केलिए चुकाए गए ब्याज पर कर छूट की सीमा बढ़ाने से सरकार को घाटा नहीं होगा।
इस मद में यदि आयकर में कम वसूली होती है तो दूसरी तरफ केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और सर्विस टैक्स के मद में सरकार की वसूली बढ़ेगी। इसलिए अंतत: सरकार को घाटा नहीं होगा क्योंकि रीयल एस्टेट क्षेत्र में मांग बढ़ने से इन करों की प्राप्ति का प्रतिशत भी बढ़ेगा।