निर्भया का नाबालिग गुनहगार सिर्फ तीन साल जेल में रहकर रिहा हो गया तो हर कोई सन्न रह गया। इतने जघन्य अपराध पर इतनी कम सजा क्यों? यह सवाल हर ओर से उठा।
चिंता इसलिए भी, क्योंकि निर्भया एक नहीं, अनेकों हैं। आगरा बाल संप्रेक्षण गृह में 82 बंदी हैं, जिनमें से 50 पर हत्या, रेप, डकैती, अपहरण जैसे बेहद संगीन आरोप हैं, और उम्र 18 साल से कम। ये भी निर्भया के नाबालिग गुनहगार की तरह ज्यादा से ज्यादा तीन साल कैद में रहकर खुले घूमेंगे।
इनमें से 22 नाबालिगों पर रेप का आरोप है। ऐसे भी हैं, जिन्होंने नाबालिग लड़की का अपहरण करने के बाद रेप किया, मतलब सोची समझी साजिश के तहत।
इनके अतिरिक्त पांच ने रेप के बाद खून से भी हाथ रंगे। जुर्म के दलदल में दफन होती इस मासूमियत का अफसोसजनक पहलू यह भी है कि इनके गुनाह का शिकार होने वाले भी ज्यादातर नाबालिग ही हैं।
रेप और हत्या के पांच मामले हैं। निर्भया की तरह इन लड़कियों की दरिंदगी के बाद हत्या कर दी गई। पांचों घटनाओं में नाबालिग लड़कियों को शिकार बनाया गया। बाल अपराधियों के गुनाह देखिए, कासगंज के नगला हीरामन में लड़की के साथ 17 साल के किशोर ने रेप किया।
आगरा के इरादतनगर में लड़की की रेप के बाद हत्या कर दी गई। आरोपी की उम्र भी 17 साल है। फीरोजाबाद के जसराना में नाबालिग की रेप के बाद हत्या की गई। आरोपी 16 साल का है। सिरसागंज में 17 साल का किशोर डाका डालने के जुर्म में पकड़ा गया।