चौतरफा दबाव और भारी विरोध के चलते सरकार ने बृहस्पतिवार की रात सातवें सिलेंडर (बिना सब्सिडी वाले) की कीमत में वृद्धि का फैसला टाल दिया। बृहस्पतिवार को ही गैर रियायती सिलेंडर की कीमत में 26.5 रुपये बढ़ोतरी का फैसला किया था।
माना जा रहा है कि सरकार ने कीमत वृद्धि का फैसला गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव को देखते हुए किया है। एक तेल कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कीमत वृद्धि का फैसला टालने की जानकारी देते हुए इसकी वजह बताने से इनकार कर दिया। अफसर ने बताया कि व्यवसायिक और विशेष श्रेणी के सिलेंडरों की कीमतों में की गई बढ़ोतरी को भी टाल दिया गया है।
इससे पहले सरकार ने बृहस्पतिवार को गैर रियायती गैस सिलेंडरों की कीमतों में 26.50 रुपये की बढ़ोतरी कर आम आदमी को करारा झटका दिया था। यह वृद्धि तेल कंपनियों की ताजा समीक्षा के बाद की गई थी। इसके अनुसार दिल्ली में सातवें सिलेंडर के लिए 895 रुपये 50 पैसे की जगह 922 रुपये का भुगतान करना पड़ता। नई कीमत बृहस्पतिवार से लागू करने की घोषणा की गई थी।
इसके साथ ही अस्पताल और विद्यालयों में उपयोग होने वाले विशेष श्रेणी के सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमत में 24 रुपये और व्यवसायिक उपयोग वाले (19 किलो) सिलेंडर की कीमत में 26 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। सब्सिडी प्राप्त रसोई गैस की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। तेल कंपनियों ने इस बढ़ोतरी के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने को जिम्मेदार ठहराया था।
भाजपा ने कहा था जनता के साथ धोखा
भाजपा ने रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि को जनता के साथ धोखा करार दिया था। पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि देश में महंगाई पहले से ही चरम पर है। ऐसे में यूपीए सरकार ने रसोई गैस के दाम बढ़ाकर जनता के साथ धोखा किया है।