फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हैलो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, यहां छिपा है कालाधन!

विज्ञापन
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव में काले धन के इस्तेमाल और फिजूलखर्ची पर नकेल कसने के लिए बना आयकर विभाग का कंट्रोल रूम दिल्ली में कारगर साबित नहीं हुआ। एक तरफ जहां दिल्ली से सटे गाजियाबाद, नोएडा और बुलंदशहर जैसे इलाकों में आए दिन नकदी पकड़ी जा रही है, वहीं दिल्ली में तमाम एजेंसियां एक करोड़ रुपया भी जब्त नहीं कर सकी हैं।
विज्ञापन


देश भर में चुनाव आयोग ने अभी करीब 200 करोड़ रुपये की नकदी जब्त कराई है। लेकिन दिल्ली में काला धन पकड़ में नहीं आ पाया है। दिल्ली में आयकर विभाग के कंट्रोल रूम को ज्यादातर फर्जी शिकायतें ही मिली हैं।

दिल्‍ली में कालेधन का प्रयोग नहीं हो रहा

गत सात अप्रैल को ही गाजियाबाद में आयकर विभाग ने करीब 4 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की गई। इस अभियान से जुड़े आयकर विभाग के निदेशक (जांच) एके त्रिपाठी ने अमर उजाला को बताया कि विशेष अभियान चलाकर उत्तर प्रदेश में अभी तक करीब 10 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की जा चुकी है।

इसमें से ज्यादातर राशि दिल्ली से सटे पश्चिमी यूपी से पकड़ी गई है। यूपी में आयकर विभाग को भले को काला धन पकड़ने में कामयाबी मिल रही है। लेकिन दिल्ली की स्थिति इसके उलट है।

दिल्ली में आयकर विभाग की जांच शाखा से मिली जानकारी के अनुसार, 9 अप्रैल तक दिल्ली में आयकर विभाग समेत सभी जांच एजेंसियों द्वारा जब्त नकदी का आंकड़ा एक करोड़ रुपये तक भी नहीं पहुंचा है। दिल्ली क्षेत्र से जुड़े आयकर विभाग के अधिकार मानते हैं कि दिल्ली में धनबल का बढ़-चढ़कर इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इसलिए ज्यादा मामले पकड़ में नहीं आए हैं।
विज्ञापन

टोल फ्री नंबर पर फर्जी शिकायतें

चांदनी चौक इलाके में वोटरों को नोट देकर लुभाने के आरोपों को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच खींचतान तेज हो गई है। यह मामला चुनाव आयोग तक पहुंच चुका है।

लेकिन ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए बने आयकर विभाग कंट्रोल रूम फर्जी शिकायतों से परेशान है। कंट्रोल रूम से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि चुनाव में ब्लैक मनी के इस्तेमाल के बजाय टोल फ्री नंबर पर अनाप-शनाप कॉल आ रही हैं।

कई लोग उम्मीदवारों द्वारा आचार संहिता के उल्लंघन की फर्जी शिकायतें भेज रहे हैं, जबकि कुछ लोग आयकर से जुड़ी अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें