वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू हो जाने के बाद देश में उद्योगों और कारोबार को तो पंख लगेंगे ही, काले धन के कैंसर से निपटने में भी इसके काफी कारगर साबित होने की उम्मीद है। इसके अलावा जीएसटी राज्यों की आमदनी भी बढ़ाएगा।
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जीएसटी सिस्टम के काम करना शुरू करने के बाद, अधिकतर काले धन के स्रोत ही बंद हो जाएंगे। अभी अप्रत्यक्ष कर संग्रहण में इतनी एजेंसियां लगी हुई हैं और उनमें आपसी तालमेल का इतना अभाव है कि चाह कर भी राज्य सरकारें सही-सही कई तरह के वाणिज्यिक कर नहीं वसूल पातीं। इस वजह से काला धन बढ़ता चला जाता है।
दिल्ली का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि आधिकारिक तौर पर माना गया है कि यहां वाणिज्यिक कर संग्रहण की जितनी संभावना है, उसका एक तिहाई संग्रहण ही हो पाता है। यह तो हुआ सरकारी आंकड़ा। लेकिन, इस क्षेत्र पर नजदीकी नजर रखने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट और टैक्स कंसल्टेंटों का मानना है कि यहां कर संग्रहण की संभावना का दसवां हिस्सा भी सरकारी खजाने में नहीं जा पाता। दिल्ली के चांदनी चौंक और आसपास के थोक बाजार में चले जाइए, कहीं भी पक्के बिल पर काम नहीं होता है। जीएसटी लागू होने के बाद इस स्थिति में बदलाव आएगा।
अंतरराष्ट्रीय कंसल्टेंसी फर्म डेलॉय इंडिया की सीनियर डाइरेक्टर और अप्रत्यक्ष कर की विशेषज्ञ चार्टर्ड अकाउंटेंट सलोनी राय ने अमर उजाला को बताया कि जीएसटी सिस्टम लागू होने के बाद कर चोरी की संभावना बेहद कम हो जाएगी। ऐसी स्थिति में सरकारी खजाने में वह रकम भी जमा होगी, जो अभी चोरी कर ली जा रही है। इसके दो फायदे होंगे, पहला तो काले धन का निर्माण नहीं होगा और दूसरा, राज्य सरकारों की आमदनी बढ़ेगी।
उद्योग संगठन फिक्की में जीएसटी पर गठित टास्क फोर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक काले धन पर लगाम लगाने के लिए जीएसटी एक बेहतरीन प्लेटफार्म है। इसके बन जाने के कारण कोई सामान का विक्रेता यदि कर चुराने की कोशिश करे भी, तो वह अधिकारी की नजर से बच नहीं पाएगा, क्योंकि उस सामान का निर्माता उसके बार में जानकारी सिस्टम में फीड कर चुका होगा और जैसे ही वह कर चुराने की कोशिश करेगा, कर अधिकारी द्वारा पकड़ा जाएगा।
फिक्की द्वारा ही जीएसटी पर कराए गए एक अध्यययन के मुताबिक इस क्षेत्र में एक बेहद कारगर खरीद-बिक्री ट्रैकिंग सिस्टम बनाया जाएगा। साथ ही ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि इसमें दर्ज हुए बिना कोई भी उत्पाद बाजार में न जाने पाए। जब राज्य सरकारों और केंद्र का सिस्टम एक होगा, तो फिर कर चोरी की गुंजाइश नहीं रह जाएगी।
वित्त मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी के मुताबिक जीएसटी से राज्यों की आमदनी में उल्लेखनीय इजाफा होगा। उनके मुताबिक इस समय जो सिस्टम चल रहा है, उसमें केन्द्र सरकार द्वारा वसूले जाने वाले उत्पाद शुल्क की तो वसूली ठीक-ठाक हो जाती है, लेकिन राज्य सरकार उस पर सही-सही वाणिज्यिक कर नहीं वसूल पाती। जीएसटी में केन्द्र और राज्य के लिए एक ही सिस्टम होन पर ऐसा नहीं होगा।