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अगले वित्त वर्ष में 6 फीसदी से अधिक रहेगी विकास दर

Wed, 27 Feb 2013 11:38 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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देश की आर्थिक विकास दर भले ही निचले पायदान पर आ गई हो लेकिन वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार रघुराम जी राजन को यह भरोसा है कि अगले वित्त वर्ष में 6 फीसदी से अधिक विकास दर का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
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उन्होंने अर्थव्यवस्था के एक दफा फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि देश भले ही कठिन दौर से गुजर रहा है, लेकिन इससे उबरना नामुमकिन नहीं है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था से मंदी का दौर लगभग खत्म हो गया है।

आर्थिक सर्वेक्षण पर संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने तमाम सर्वे, एफएमसीजी क्षेत्र में खपत के आंकड़ों का विशेषतौर पर उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी नीतियां सही दिशा में जा रही है, इससे स्थिति में सुधार की तस्वीर नजर आ रही है। उम्मीद है कि अगले साल स्थिति और बेहतर होगी।
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हालांकि आर्थिक सर्वेक्षण से यह स्पष्ट है कि वर्ष 2009-10 और 2010-11 में 8.6 फीसदी और 9.3 फीसदी विकास दर हासिल किया गया, लेकिन 2011-12 में यह घटकर 6.2 फीसदी रही और चालू वित्त वर्ष में अब महज 5 फीसदी विकास दर की संभावना ही जताई जा रही है। ऐसे में किन आधारों पर उन्होंने एक फीसदी से अधिक विकास दर हासिल करने की संभावना जताई है, इसका कोई विस्तार में उन्होंने जिक्र नहीं किया।

उन्होंने कहा कि देश में मंदी प्रमुख रुप से वैश्विक कारणों से थी। तमाम सरकारी उपायों से 2013-14 में भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावना बन सकती है। उन्होंने कहा कि चालू खाता घाटा, महंगाई, वित्तीय घाटा और व्यापारिक घाटा पर काबू पाना अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए जरूरी है। इसलिए खर्चों में कमी लाने के लिए चतुराई भरे कदम उठाने होंगे।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा से सरकारी खजाने पर सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा। सरकार को सब्सिडी बोझ करने के साथ निवेश बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले वित्त वर्ष में महंगाई से आम आदमी को थोड़ी राहत मिल सकती है।

राघुराम राजन ने चालू खाता घाटा कम करने के लिए सोने की खरीद महंगा करने पर अपनी सहमति जताई। वहीं सरकार के साथ आरबीआई को भी वित्तीय समेकन पर ध्यान देने की बात कही। राजन ने कहा विश्वसनीय बजटीय योजना के साथ कृषि उत्पादन में इजाफा करने से महंगाई कम करने में मदद मिलेगी।

वहीं आरबीआई को भी नीतिगत दरों में कटौती करने का मौका मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि उच्च वित्तीय घाटा, निवेश में कमी, बचत दर में गिरावट, उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति की उच्च दर जैसे मामलों पर तत्काल ध्यान देकर मैक्रो इकोनॉमिक स्थिरता लाना भी जरूरी है।

एक सवाल के जवाब में राजन ने कहा कि भारतीय बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटाने के लिए सरकार ने आर्थिक सुधार की नीतियों को पेश करना शुरू कर दिया है। डीजल के दाम को आंशिक रूप से बाजार के हवाले करना, मल्टी ब्रांड में एफडीआई और विदेशी निवेश के नियमों को लचीला बनाकर सरकार ने इसकी शुरुआत कर दी है।
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