खरीफ सीजन में अनाज उत्पादन के पिछले पांच वर्षों के प्राथमिक अनुमानों की तुलना में चालू सीजन का पहला पूर्वानुमान भले ही सुकून देने वाला है, लेकिन उत्पादन के लिहाज से इसमें 10 फीसदी तक गिरावट संभव है। सोमवार को राष्ट्रीय रबी सम्मेलन में कृषि मंत्री शरद पवार ने यह आशंका व्यक्त की।
उन्होंने बताया कि समय पर अपेक्षित बारिश न होने के कारण धान, मोटे अनाज, दलहन और तिलहन की बुवाई प्रभावित हुई। जिसका असर उत्पादन पर पड़ना निश्चित है। हालांकि यह प्राथमिक अनुमान है। पिछले और इस महीने अच्छी बारिश हुई है। इसका फायदा रबी फसलों को मिल सकता है और इससे खरीफ उत्पादन में हुई कमी की भरपाई भी संभव है।
पवार के मुताबिक खरीफ फसलों के यह अनुमान प्राथमिक हैं, उम्मीद है कि अंतिम अनुमान इससे कहीं बेहतर होंगे। चालू वर्ष के खरीफ सत्र में खाद्यान्न उत्पादन दस प्रतिशत घटकर 11.72 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया गया है। जो पिछले खरीफ सीजन में 12.99 करोड़ टन था। कमजोर मानसूनी बरसात और कुछ राज्यों में सूखे की स्थिति की वजह से यह स्थिति बनी है।
खरीफ की प्रमुख फसल चावल का उत्पादन घटकर 8.56 करोड़ टन रह सकता है, जो पिछले खरीफ के दौरान 9.15 करोड़ टन था। इसी प्रकार दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों के उत्पादन में भी कमी का अनुमान लगाया गया है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, खरीफ फसलों के पहले पूर्वानुमान में दलहनों का उत्पादन 52.60 लाख टन होने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 61.60 लाख टन था।
इसी प्रकार मोटे अनाज का उत्पादन 3.23 करोड़ से घटकर 2.63 करोड़ टन रहने की आशंका है। तिलहनों का उत्पादन 1.88 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले खरीफ सीजन में 2.78 करोड़ टन हुआ था। कपास का उत्पादन भी 3.52 करोड़ गांठ से घटकर 3.34 करोड़ गांठ रहने का अनुमान लगाया गया है। इसी प्रकार गन्ने का उत्पादन भी 2.23 करोड़ टन तक घटने की आशंका है। इस साल गन्ने का उत्पादन 33.53 करोड़ रहने का अनुमान है जो पिछले वर्ष 35.76 करोड़ टन था।