सरकार किसान विकास पत्र (केवीपी) को एक नए रूप में पेश करने जा रही है। इसे लड़कियों और विकलांग लोगों के लिए बचत के एक विकल्प के तौर पर पेश किया जाएगा।
वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव (बजट) रजत भार्गव ने बताया कि हम नया किसान विकास पत्र लांच करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसे बचत और निवेश के एक अलग तरह के विकल्प के रूप में पेश किया जाएगा। इसे लड़कियों और अब तक अन्य विकल्पों में कवर न होने वाले विकलांग लोगों को ध्यान में रखते हुए पेश किया जाएगा।
इससे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली भी अपने पहले बजट में केवीपी को फिर से लांच करने की बात कह चुके हैं। उन्होंने कहा था कि वह केवीपी को ऐसे विकल्प के रूप में पेश करना चाहते हैं, जिसमें लोग अपनी बैंकों में जमा और घरेलू बचत की रकम को लगाना चाहें।
गौरतलब है कि केवीपी को यूपीए सरकार ने 2011 में श्यामला गोपीनाथ कमेटी की सिफारिश पर बंद कर दिया गया था। कमेटी ने बचत के इस विकल्प के भारी दुरुपयोग की बात कही थी। किसान विकास पत्र निवेश का लोकप्रिय माध्यम था जिसमें आठ साल सात माह में रकम दोगुनी हो जाती थी। देश के डाकघरों के जरिए इसकी बिक्री करती थी। नई सरकार वित्तीय समावेशन के लेकर काफी संजीदा है और किसान विकास पत्र को परिवर्तन के साथ शुरू कर रही है।