प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने बुधवार को बिजली क्षेत्र को संकट से उबारने के लिए गैस कीमतों की पूलिंग की नीति को अपनी मंजूरी दे दी।
सरकार के इस बड़े फैसले से गैस की किल्लत के चलते बेकार पड़े 24,800 मेगावाट क्षमता वाले पावर प्लांटों को जीवनदान मिल गया। इससे घरों में पाइप के माध्यम से होने वाली गैस की आपूर्ति में भी बढ़ोतरी होगी।
सरकार ने अपने फैसले में ऐसा प्रावधान किया है कि गैस की पूलिंग से बिजली की कीमत में बढ़ोतरी नहीं होगी। क्योंकि गैस पूलिंग से जुड़े स्टेकहोल्डर्स इस काम में कोई मुनाफा नहीं कमाएंगे। गैस पूलिंग के इस फैसले से गैस आधारित पावर प्लांटों में निवेश किए गए लगभग एक लाख करोड़ रुपये गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की श्रेणी में जाने से बच जाएंगे।
देश में इस समय ग्रिड से जुड़े 24,150 मेगावाट क्षमता के गैस आधारित पावर प्लांट हैं। इनमें से 14,305 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट को गैस की कोई आपूर्ति नहीं की जा रही है और यह पावर प्लांट बिल्कुल बेकार पड़े हैं। इनके बेकार होने से 60,000 करोड़ रुपये एनपीए होने के कगार पर थे।
बाकी के 9,845 मेगावाट को घरेलू स्तर पर काफी कम मात्रा में गैस की आपूर्ति की जा रही थी जो 30 फीसदी से भी कम प्लांट लोड फैक्टर पर चल रहे हैं। इन 9,845 मेगावाट में 40,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।