दुनिया की दिग्गज रिटेल कंपनी वालमार्ट पर लगे लॉबिंग के आरोपों की जांच के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जांच समिति के गठन को मंजूरी दे दी है। सरकार ने इस जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। हाईकोर्ट के पूर्व जज या चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली यह समिति वालमार्ट की लॉबिंग पर आई मीडिया रिपोर्टों के अलावा इस बात की जांच भी करेगी कि कंपनी ने किसी भारतीय कानून का उल्लंघन तो नहीं किया है। समिति को तीन महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देनी है।
पिछले महीने अमेरिकी सीनेट को वालमार्ट ने भारत समेत कई देशों में प्रवेश के लिए लॉबिंग पर किए खर्च का ब्यौरा दिया था, जिसके बाद देश में यह मुद्दा तूल पकड़ गया और विपक्ष ने कई दिनों तक संसद में खूब हंगामा किया।
कॉरपोरेट मामलों के राज्यमंत्री सचिन पायलट का कहना है कि संसदीय कार्यमंत्री (कमलनाथ) ने संसद को वॉलमार्ट पर लगे आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित करने का भरोसा दिया था। उन्होंने बताया कि पूर्व जज या चीफ जस्टिस को इस समिति का अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव है।
मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, यह समिति जांच आयोग कानून, 1951 के तहत बनाई जाएगी जिसकी रिपोर्ट और उस पर हुई कार्रवाई से संसद को अवगत कराना जरूरी होता है। देश के रिटेल क्षेत्र में प्रवेश के लिए लॉबिंग का सहारा लेने के आरोपों के अलावा यह समिति देश में वालमार्ट की बाकी गतिविधियों की जांच भी करेगी।
सरकार ने समिति की जांच के दायरे में ऐसी सभी गतिविधियों को शामिल किया है, जो किसी भी भारतीय कानून के खिलाफ हैं। इससे कंपनी की दिक्कतें बढ़ सकती हैं क्योंकि वालमार्ट का भारती समूह में निवेश भी सवालों के घेरे में है। इस मामले को उठाने वाले केरल से राज्यसभा सांसद एमपी अच्युतन मामले की शिकायत प्रधानमंत्री से कर चुके हैं।
वाणिज्य मंत्री का वालमार्ट को भरोसाः भले ही सरकार ने वालमार्ट पर लगे लॉबिंग के आरोपों पर जांच समिति गठित कर दी हो लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत ने वालमार्ट को देश की एफडीआई नीति से बेफ्रिक रहने का भरोसा दिया है। वृहस्पतिवार को दावोस में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने वालमार्ट इंटरनेशनल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डग मैकमिलन के साथ मुलाकात की।
मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, आनंद शर्मा ने वालमार्ट सीईओ से कहा है कि मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई को लेकर भारत की नीति को अंतिम रूप दिया जा चुका है और किसी तरह के नीतिगत बदलाव को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। अगर कंपनी को एफडीआई नीति पर कोई सफाई चाहिए तो लिखित में मंत्रालय से मांग कर सकती है। इसमें सरकार पूरा सहयोग देगी। उधर, वालमार्ट की ओर से भारत में योजनाओं को लेकर कोई बड़ा ऐलान नहीं किया गया है।