महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी को प्याज अभी और रुलाएगी। निर्यात पर रोक लगाने के सरकार के फैसले और खरीफ में मानसून की लेट-लतीफी के बीच प्याज की कीमतों में फिलहाल गिरावट की संभावना कम दिख रही है।
इसी कारण सस्ते प्याज के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल प्याज का उत्पादन 20 फीसदी कम होने की आशंका है। दिल्ली में प्याज का थोक दाम 1000 से 2500 रुपये क्विंटल चल रहा है।
वाणिज्य मंत्रालय का तर्क है कि फसल खराब होने से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में यदि इसके निर्यात पर पाबंदी लगाई गई, तो इसका खामियाजा किसानों को ही भुगतान पड़ सकता है। ऐसे में आम आदमी को सस्ते प्याज के लिए वैश्विक मांग के स्थिर होने तक इंतजार करना होगा।
कृषि मंत्रालय के मुताबिक खरीफ में मानसून की लेट-लतीफी से प्याज की फसल प्रभावित हुई। समय से बारिश न होने के कारण प्याज का साइज भी छोटा रह गया है। लिहाजा जिन किसानों ने समय रहते सिंचाई की व्यवस्था की, उनकी फसल अच्छी हुई है। जबकि वर्षा पर निर्भर किसानों की फसलें कमजोर हुई हैं।
इन्हीं कारणों के चलते इस साल प्याज का उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले बीस फीसदी तक घटने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हालांकि उत्पादक क्षेत्रों से प्याज की निकासी अच्छी हो रही है। मगर उत्पादक मंडियों में निर्यातकों की खरीद से भाव ऊंचे होने का असर उपभोक्ता मंडियों की कीमतों पर भी पड़ा है।
हालांकि उत्तर भारत की मंडियों में राजस्थान से प्याज की छिटपुट आवक से छोटे साइज के प्याज के दाम लगातार नीचे उतर रहे हैं। इसके बावजूद अभी तक कीमतें सामान्य नहीं हो पाई हैं। दिल्ली में प्याज का थोक दाम 1000 से 2,500 रुपये क्विंटल रह गया है।
सप्ताह भर में कीमतें 700 रुपये क्विंटल तक घट चुकी हैं। वहीं महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में उम्दा क्वालिटी का प्याज अभी भी ऊंचा बना हुआ है। इन मंडियों में प्याज का थोक दाम 500 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहा है।
कृषि मंत्रालय के मुताबिक मानसून में देरी के चलते खरीफ सीजन में प्याज की बुवाई प्रभावित हुई थी। इसके चलते पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष प्याज की पैदावार बीस फीसदी तक घटकर 136 से 138 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है।
देश के कुल उत्पादन में पचास फीसदी का योगदान करने वाले महाराष्ट्र और कर्नाटक में प्याज की फसल 35 फीसदी तक कमजोर है। चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक प्याज का निर्यात 12.95 लाख टन हो चुका है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले लगभग दो लाख टन अधिक है।
आलू प्याज मर्चेंट्स एसोसिएशन आजाद पुर (दिल्ली) के महामंत्री राजेंद्र शर्मा के मुताबिक राजस्थान से छोटी प्याज की निकासी में सुधार से तेजी का दौर भले ही समाप्त हो गया है। मगर इस साल प्याज की कीमतों में ज्यादा कमी की उम्मीद बेईमानी है। इसका प्रमुख कारण बांग्लादेश, पाकिस्तान, इजराइल और खाड़ी देशों की लगातार बढ़ती खरीद है।