चालू वित्तवर्ष की अवधि में कोई भी अतिरिक्त उधारी लेने से इनकार करते हुए वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि सरकार मौजूदा सीमा के अंतर्गत ही बढ़े हुए खर्चों को समायोजित करने में सक्षम है।
संसद के बाहर संवाददाताओं को चिदंबरम ने बताया कि 28,500 करोड़ रुपये की पेट्रोलियम सब्सिडी, एयर इंडिया में करीब 2,000 करोड़ रुपये की इक्विटी देना और कुछ छोटे खर्चों पर 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय है।
उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि सरकार इस राशि को अपनी मौजूदा उधारी सीमा के अंतर्गत समायोजित कर सकती है। उन्होंने कहा कि हमें नहीं लगता कि इस समय हमें इन खर्चों के लिए और उधारी लेने की जरूरत है।
खर्चे और कमाई के बीच के अंतर को पाटने के लिए सरकार ने चालू वित्तवर्ष के दौरान 5.7 लाख करोड़ रुपये की उधारी का अनुमान लगाया था।
वित्तमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि वित्तीय घाटा बढ़कर जीडीपी का 5.3 फीसदी तक हो सकता है, जबकि चालू वित्तवर्ष के लिए इसका बजटीय अनुमान 5.1 फीसदी था।
वित्तवर्ष 2012-13 की पहली छमाही में ही वित्तीय घाटा बढ़कर 3.37 लाख करोड़ रुपये तक हो गया है, जो बजटीय अनुमान का 65.6 फीसदी है।
सरकार गत 30 सितंबर को समाप्त छमाही तक ही 3.7 लाख करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। यह कुल अनुमानित उधारी का 65 फीसदी है।