सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को आधार नंबर से जोड़ने की योजना में भले ही देरी हो रही हो। मगर इस योजना के पूरी तरह से शुरू होने पर न सिर्फ फर्जी कार्ड धारकों को अनाज मिलना बंद हो जाएगा बल्कि सरकार को भी करोड़ों रुपये के अनाज का फायदा होगा।
आंध्र प्रदेश के पूर्व गोदावरी के एक जिले में पीडीएस को आधार नंबर से जोड़ने पर लगभग सात फीसदी लोगों ने राशन लेना बंद कर दिया है। इससे सरकार को 1.20 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है। सरकार का मानना है कि आधार नंबर से पीडीएस को जोड़ने पर ही खाद्य सुरक्षा का उद्देश्य पूरा हो सकेगा।
ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश का कहना है कि अगर एक जिले में सात प्रतिशत फर्जी कार्डों से राशन बंद होने पर सरकार को इतना फायदा हो सकता है तो पूरे देश भर में इस योजना के क्रियान्वयन के बाद सरकार को कितना लाभ होगा। इसका अभी केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है।
रमेश के मुताबिक आधार नंबर के साथ धारक के बहुत से बायोमेट्रिक फीचरों को भी जोड़ा गया है। इसमें कार्ड धारक को राशन लेते समय राशन की दुकान पर उन बायोमेट्रिक फीचरों की छाप को भी अंकित करना पड़ता है जो आधार नंबर के साथ जुड़े हुए होते हैं।
बायोमेट्रिक छाप देने की बाध्यता के कारण फर्जी कार्ड धारक ने राशन लेना बंद कर दिया। इसके अलावा मृतक के नाम पर राशन लेने वाले लोगों को भी राशन मिलना बंद हो गया, जिसका सीधा लाभ पीडीएस को हुआ है। खाद्य मंत्रालय की माने तो पिछले वर्ष देश भर में हुई जांच में 40 लाख से ज्यादा फर्जी राशन कार्ड पकड़े गए, जबकि पिछले तीन वर्षों के दौरान यह संख्या एक करोड़ से ऊपर पहुंच गई है।
खाद्य मंत्री प्रो. केवी थॉमस का कहना है कि अभी 5.09 लाख सस्ते गल्ले की दुकानों के जरिए देश भर के लगभग 17.54 करोड़ लोग पीडीएस का लाभ ले रहे हैं। राज्य सरकारों के पिछले वर्ष दिसंबर तक नए कार्ड बनाए जाने से कार्ड धारकों की संख्या बढ़कर 23.76 करोड़ हो गई है।