कुंभ मेले में तमाम अजब-गजब और निराले साधु-संत नजर आ रहे हैं। कोई बाबा हाईटेक है तो कोई लंबी जटाधारी। कोई एक पैर पर खड़ा है तो किसी ने अपना हाथ उठा रखा है। मगर मेले में हजारों संन्यासी और नागा साधुओं के बीच गोल्ड बाबा भी मौजूद हैं।
सुधीर कुमार उर्फ बिट्टू जी महाराज उर्फ गोल्ड बाबा सोने के आभूषण और हीरे की घड़ी पहने अलग ही दमकते नजर आते हैं। शरीर पर लगभग डेढ़ करोड़ के गहने हैं सो पुलिस भी साथ रहती है।
सुधीर कुमार उर्फ गोल्ड बाबा दिल्ली के गांधीनगर से आए हैं। पंच दशनाम जूना अखाड़ा से जुड़े हरिहर आश्रम में ठहरे गोल्ड बाबा खुद को श्री महंत मछन्दर पुरी जी महाराज और महंत भरत पुरी का शिष्य बताते हैं।
45 वर्षीय गोल्ड बाबा बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही सोने के जेवरात का शौक रहा है। करीब 20 साल से वह भारी मात्रा में गहने और सोने-हीरे से बनी घड़ी पहनने लगे। माथे पर लंबा टीका और शरीर पर लकदक गहने पहने गोल्ड बाबा अलग ही दिखते हैं।
गोल्ड बाबा खुद बताते हैं कि उन्होंने चार किलो से भी ज्यादा सोने के आभूषण धारण किए हैं। उनके सभी हार में देवी-देवताओं मसलन शिव, पार्वती, दुर्गा, हनुमान, साईं बाबा, सरस्वती, लक्ष्मी आदि के भारी लॉकेट हैं। बाबा रामदेव ने भी उन्हें श्री यंत्र लॉकेट युक्त हार भेंट किया था। रात में सोते वक्त ही वह आभूषण उतारते हैं। सुबह स्नान के बाद इन आभूषणों की पूजा करते हैं। तब उन्हें शरीर पर धारण करते हैं।
गोल्ड बाबा बताते हैं कि उनकी हीरा जड़ित खास घड़ी की कीमत 27 लाख रुपये है। जूता भी खासा महंगा है। ढाई लाख रुपये का। कपड़े भी हरदम विलायती और ब्रांडेड पहनने के शौकीन हैं। काफिले में भी मर्सिडीज बेंज जैसी चार महंगी गाड़ियां चलती हैं। गोल्ड बाबा स्वीकारते हैं कि वह खुद संन्यासी नहीं है बल्कि संयासियों के शिष्य हैं।
उनका दिल्ली में रेडीमेड कपड़ों का कारोबार है। वह प्रयाग में वर्ष 2001 के कुंभ और 2007 के अर्धकुंभ में भी आए थे। इस महाकुंभ में भी सभी शाही स्नान करेंगे। मंगलवार को मेले में निकले तो लोग उन्हें निहारने लगे।