देश के 5.3 करोड़ घरों तक आज भी बिजली नहीं पहुंच सकी है। इसके अलावा बिजली के अभाव में भारी संख्या में दफ्तर और फैक्ट्रियां डीजल जेनरेटर के सहारे चल रहे हैं। केंद्र सरकार आने वाले वर्षों में इस स्थिति में तेजी से बदलाव लाना चाहती है। ऊर्जा, कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार अगले पांच वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में करीब 15 लाख करोड़ रुपये (250 अरब डॉलर) का निवेश करके 2019 तक देश को खपत से ज्यादा बिजली बनाने वाला देश बनाना चाहती है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और सीआईआई द्वारा आयोजित इंडियन इकोनॉमिक समिट के एक सत्र को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि देश में चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति करना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसी के चलते सरकार ने सभी लोगों तक बिजली पहुंचाने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल कर रखा है। अगले पांच साल में देश में बिजली की खपत दो गुने स्तर तक पहुंचने का अनुमान है।
इसे देखते हुए सरकार बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए द्विस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत एक ओर प्लांट लोड फैक्टर में सुधार लाकर मौजूदा संसाधनों का कुशलता पूर्वक पूरा इस्तेमाल करने पर काम किया जा रहा है। दूसरी ओर सरकार अत्याधिक दबाव वाले संसाधनों पर बोझ घटाने और ईंधन की आपूर्ति को सुधारने पर ध्यान दे रही है।
गोयल ने बताया कि इसके अलावा सरकार नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ाकर भी बिजली क्षेत्र की दशा सुधारने की ओर भी ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार एक अध्यादेश लाकर कोयले की समस्या का समाधान करना चाहती है और उन्हें उम्मीद है कि इससे कोयला उत्पादन में निजी क्षेत्र के योगदान को एक बार फिर से बढ़ाया जा सकेगा। इन सब कदमों के जरिए सरकार अगले पांच वर्षों में कोयले का उत्पादन दोगुना करना चाहती है, ताकि थर्मल पावर संयंत्रो की बिजली उत्पादन क्षमता का पूरा-पूरा उपयोग किया जा सके।
गोयल ने बताया नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र पर सरकार खास जोर देने वाली है। सरकार 2019 तक देश में सौर ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाना चाहती है। ऊर्जा क्षेत्र के लिए ज्यादा रकम जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार अगले पांच वर्षों में करीब 15 लाख करोड़ रुपये (250 अरब डॉलर) का निवेश इस क्षेत्र में करना चाहती है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत लाइट एंड पावर के अध्यक्ष व मुख्य कार्यकारी अधिकारी टीपी चोपड़ा ने कहा कि आबादी के साथ-साथ देश में बिजली की खपत भी तेजी से बढ़ रही है। बढ़ते शहरीकरण और महानगरों के विकास से इसमें और भी तेजी आई है। इस लिए इस समय बिजली की उपलब्धता, विस्तार और उसकी कीमतों को वाजिब स्तर पर रखना देश के प्रमुख मसलों में शामिल है।
उन्होंने देश में आधुनिक तकनीक को अपना कर देश की विद्युत उत्पादन प्रणाली के ज्यादा दक्षतापूर्ण इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा सहित अन्य नवीकरणीय ऊर्जा की उत्पादन लागत में आ रही कमी इसे देश में बिजली उत्पादन के एक वैकल्पिक माध्यम के रूप में स्थापित कर सकती है।