देश की आतंरिक सुरक्षा को आतंकवादी, अलगाववादी और नक्सली हिंसा की गंभीर चुनौतियों से बचाने के लिए वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने सरकार का खजाना खोला है। इसके लिए गृह मंत्रालय के बजट में 8500 करोड़ रुपये का इजाफा भी किया गया है। मगर आए दिन आंतरिक सुरक्षा के चौतरफा खतरों से जूझ रहे गृह मंत्रालय को चिदंबरम की यह दिलदारी कुछ खास नहीं लग रही।
इस साल के बजट में आंतरिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार गृहमंत्रालय के लिए कुल 59,241 करोड़ का प्रावधान है। आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा समझे जाने वाले नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए 1000 करोड़ के अतिरिक्त कोष का भी ऐलान किया गया है।
खुफिया जानकारी इकट्ठा करने वाली आईबी को 1,196 करोड़ रुपये दिए गए हैं। आवास की समस्या से जूझ रही केंद्रीय पुलिस संस्थाओं के कर्मियों और अधिकारियों के रहने पर इस साल 1527 करोड़ खर्च होंगे। प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पूर्व पीएम वाजपेयी जैसे वीवीआईपी की सुरक्षा में लगी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) को 386 करोड़ मिलेंगे।
बजट में पुलिस विभाग के आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया है। साथ ही नक्सल इलाकों में सुरक्षा बल पर खर्च करने के बजाए विभिन्न योजनाओं के तहत प्रगति को तवज्जो दी जा रही है।
देश की सबसे बड़ी केंद्रीय पुलिस बल सीआरपीएफ के लिए वित्त मंत्री ने 10,818 करोड़ और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लिए 9,812 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है। आतंकवाद के मामलों की जांच के लिए बनी नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को दुरुस्त करने के मकसद से सरकार ने इस साल 104 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है।
इसी तरह खुफिया विभाग आईबी की तकनीकी तौर पर मदद करने वाली नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड को 57 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं।