विदेशी निवेशकों की घटती रुचि और बढ़ते चालू खाता घाटा को संभालने के लिए अब सरकार बांड का सहारा ढूंढ रही है।
विदेशी पूंजी जुटाने के लिए सरकार सॉवरेन बांड लाने की संभावनाएं तलाश रही है। इसके तहत, शुक्रवार को वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार रघुराम राजन ने विदेशी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।
बैठक के बाद रघुराम राजन ने संवाददाताओं को बताया कि सॉवरेन बांड के संबंध में बैंकर्स के साथ बातचीत हुई है। बैंकर्स ने कई सारे सुझाव दिए हैं। हम इन सुझावों की समीक्षा करेंगे।
राजन के अनुसार, बांड लाने के अलावा बैंकर्स ने यह भी सुझाव दिया है कि डेट मार्केट को और आकर्षक बनाने की जरूरत है।
विदेशी निवेशकों की बेरुखी की वजह से पिछले हफ्ते डॉलर के मुकाबले रुपया 61.21 के स्तर पर आ गया था। जो कि अभी तक का सबसे निचला स्तर था।
इसी तरह, वित्त वर्ष 2012-13 में सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले चालू खाता घाटा 4.8 फीसदी तक पहुंच गया। ऐसे में अब विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति भी नाजुक स्तर पर पहुंच रही है, जिसे देखते हुए सरकार की कोशिश है कि पूंजी जुटाई जा सके।
रुपया 11 पैसे हुआ मजबूत
घरेलू शेयर बाजारों में तेजी के बीच निर्यातकों द्वारा डॉलर की बिक्री से मुद्रा बाजार में रुपया 11 पैसे मजबूत होकर 59.56 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
मुद्रा बाजार के डीलरों का कहना है कि विदेशी पूंजी की आवक से रुपये को मजबूती मिली, हालांकि विदेशी बाजारों में डॉलर में सुधार होने से रुपये की तेजी सीमित रही। पिछले दिवस यह 59.67 पर बंद हुआ था।
अंतर बैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपये में नरमी के साथ 59.79 पर कारोबार शुरू हुआ। आयातकों खासकर तेल कंपनियों द्वारा डॉलर की मांग से यह 60.17 के निचले स्तर तक लुढ़का।
बाजार में रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप की भी चर्चा रही, जिससे रुपया 59.55 के उच्च स्तर तक गया। आखिर में पिछले सत्र की तुलना में 11 पैसे मजबूत होकर 59.56 पर बंद हुआ।