तिलहनों में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार ने इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 12 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है। बृहस्पतिवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में रबी फसलों के एमएसपी को मंजूरी दी गई। इसके तहत सरसों और लाही के एमएसपी में सर्वाधिक 500 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जबकि सनफ्लावर के दाम 300 रुपये बढ़ाकर 2800 रुपये प्रति क्विंटल किए गए हैं।
दूसरी ओर, खाद्य मंत्रालय के प्रबल विरोध के चलते फिलहाल गेहूं के एमएसपी पर कोई निर्णय नहीं हो सका है। माना जा रहा है कि गुजरात और हिमाचल के चुनावों की अधिसूचना जारी होने के कारण सरकार ने गेहूं के एमएसपी पर फैसला नहीं किया है। सीसीईए का इरादा गेहूं के एमएसपी बढ़ाने के बजाए 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बोनस देने का है, लेकिन चुनाव आचारसंहिता लागू होने के कारण अभी इसकी घोषणा नहीं की गई है।
सीसीईए ने चालू रबी सीजन में चना के एमएसपी में 200 रुपये की बढ़ोतरी की है। इसका दाम 3000 रुपये क्विंटल हो गया है। इसी प्रकार मसूर के दाम 100 रुपये बढ़ाकर 2900 रुपये प्रति क्विंटल किए गए हैं। तिलहनों के एमएसपी में सर्वाधिक 12 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।
गेहूं के एमएसपी पर कोई फैसला न होने से इसका मूल्य 1285 रुपये प्रति क्विंटल ही है। बताया जा रहा है कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने गेहूं के एमएसपी न बढ़ाने का सुझाव कृषि मंत्रालय को दिया था। इसका कारण रिकॉर्ड उत्पादन और भंडारण को बताया गया है।
वैसे कृषि मंत्रालय ने गेहूं की लागत में 14.9 फीसदी की बढ़ोतरी की बात कह कर इसका एमएसपी 1400 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग की थी। कृषि मंत्रालय के इस सुझाव का खाद्य मंत्रालय ने यह कहते हुए विरोध किया था कि इससे महंगाई तो बढ़ेगी ही, साथ ही भारतीय खाद्य निगम पर भी वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
उसका कहना था कि गेहूं की कीमत बढ़ने से आम आदमी पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। लिहाजा इसके दामों में बढ़ोतरी न की जाए। माना जा रहा है कि सीसीईए ने दो मंत्रालयों के बीच एमएसपी को लेकर विवाद को टालने के लिए गेहूं पर निर्णय नहीं किया है।