कमजोर मानसून और महंगाई की मार रोकने में जुटी केंद्र सरकार ने आलू पर 450 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लागू करने की व्यवस्था शुरू कर दी है।
इससे पहले प्याज के निर्यात पर भी इसी तरह की पाबंदी लगाई जा चुकी है। सरकार के इस फैसले से आलू का निर्यात पर ब्रेक लगेगा और घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने से रोकी जा सकती हैं।
बृहस्पतिवार को विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि आलू का निर्यात करने की छूट है, बशर्ते कि यह 450 डॉलर प्रति टन न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) की दर पर किया जाए।
यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी। सरकार इससे पहले 17 जून को प्याज पर 300 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लगा चुकी है।
इस साल मानसून में कमी के चलते सब्जियों की महंगाई भड़कने का खतरा मंडरा रहा है। अभी तक देश में औसत से करीब 37 फीसदी कम बारिश हुई है।
पिछले दो-तीन हफ्तों के दौरान दिल्ली की थोक मंडियों में आलू व प्याज की कीमतें बढ़नी शुरू हो गई हैं। ऐसे में खाने-पीने की चीजों की महंगाई रोकना मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान जाता है आलू
भारत से आलू की काफी मात्रा में पाकिस्तान भेजा जाता है। इस निर्यात से घरेलू बाजार में आलू के दाम बढ़़ने का खतरा पैदा हो गया था।
थोक व्यापारियों के मुताबिक, अटारी बॉर्डर से हर रोज 35 से 40 ट्रक आलू पाकिस्तान भेजा जा रहा है। पाकिस्तान के अलावा श्रीलंका और बांग्लादेश को भी भारत से आलू का निर्यात होता है।