तीन फरवरी से शुरू होने वाली स्पेक्ट्रम नीलामी के पहले सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को बड़ी राहत दी है।
सोमवार को वित्त मंत्री पी.चिदंबरम की अध्यक्षता वाले उच्चाधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) ने स्पेक्ट्रम इस्तेमाल करने पर कंपनियों के कुल राजस्व (एजीआर) का पांच फीसदी शुल्क लेने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया है। यह शुल्क कंपनियों को नए स्पेक्ट्रम लेने पर सरकार को देना होगा। अभी बड़े टेलीकॉम ऑपरेटर आठ फीसदी तक शुल्क सरकार को दे रहे थे।
फैसले के तहत मौजूदा कंपनियों को स्पेक्ट्रम इस्तेमाल पर अभी उनके द्वारा दिए जा रहे शुल्क के अनुसार औसत आधार से राशि देनी होगी। इसी तरह ब्राडबैंड के जरिए इंटरनेट सेवाएं देने का लाइसेंस पाने वाली मौजूदा कंपनियों को भी मौजूदा एक फीसदी शुल्क की सीमा के आधार पर राशि चुकानी होगी, पर नए स्पेक्ट्रम लेने पर कंपनियों को पांच फीसदी ही शुल्क देना होगा।
इसके पहले शनिवार को आम सहमति बनती न देख टेलीकॉम कमीशन ने फीस तय करने के तीन फार्मूले ईजीओएम के पास भेज दिए थे। जिसमें उसने तीन से लेकर पांच फीसदी तक शुल्क लेने का प्रस्ताव दिया था।
जीएसएम ऑपरेटरों के संगठन सीओएआई के महानिदेशक राजन मैथ्यू का कहना है कि सरकार के यह फैसला 4जी सेवाएं देने वाली कंपनियों के पक्ष में अधिक जाएगा। इससे रिलायंस जियो को खास फायदा पहुंचेगा। रिलायंस जियो के पास देशभर में 4जी सेवाएं शुरू करने का लाइसेंस है।
सरकार के फैसले पर पीडब्ल्यूसी इंडिया के मोहम्मद चौधरी के अनुसार सभी हिस्सेदारों के लिए बेहतर कदम है। सरकार की पहले साल आय में जरूर कमी आ सकती है, पर लंबी अवधि के लिए यह अच्छा कदम है। बड़े टेलीकॉम ऑपरेटर जो भी आठ फीसदी शुल्क दे रहे थे, उन्हें शुल्क पांच फीसदी करने से राहत मिलेगी।