एजुकेशन और सेकेंडरी एंड हायर एजुकेशन सेस की गणना सिर्फ वित्त मंत्रालय द्वारा लगाए गए टैक्स के आधार पर होगी।
सरकार ने एजुकेशन सेस (उपकर) से जुड़ी उलझन को दूर कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एजुकेशन और सेकेंडरी एंड हायर एजुकेशन सेस की गणना सिर्फ वित्त मंत्रालय द्वारा लगाए गए टैक्स के आधार पर होगी। किसी अन्य विभाग या मंत्रालय द्वारा लगाए गए सेस के आधार पर एजुकेशन सेस की गणना नहीं की जाएगी।
कारोबार जगत की ओर से काफी दिनों से एजुकेशन सेस की गणना को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही थी। वित्त मंत्रालय ने 7 जनवरी को एक सरकुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि एजुकेशन और हायर एजुकेशन सेस की गणना ऐसे सेस के आधार पर नहीं की जाएगी, जो वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) के अलावा किसी अन्य विभाग या मंत्रालय की ओर से लगाए गए हैं। भले ही इस तरह के सेस भी वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा ही वसूले जाएं।
एजुकेशन सेस सिर्फ उन्हीं शुल्कों के आधार पर लिया जाएगा, जो वित्त मंत्रालय द्वारा लगाए और वसूले जा रहे हैं।
गौरतलब है कि शुगर सेस और टी सेस जैसे कई उपकर वित्त मंत्रालय के बजाय अन्य विभागों द्वारा लगाए गए हैं, लेकिन इनकी वसूली वित्त मंत्रालय ही करता है।
कई शहरों से एजुकेशन सेस की गणना सेवा कर और उत्पाद शुल्क के साथ अन्य विभागों के सेस का जोड़कर किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। कारोबारियों के अलावा फील्ड से जुड़े अधिकारियों ने भी वित्त मंत्रालय से एजुकेशन सेस की गणना के बारे में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी।
सेवा कर और उत्पाद शुल्क के विशेषज्ञ सीए बिमल कुमार जैन का कहना है कि वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण से एजुकेशन सेस की गणना के बारे में भ्रम दूर हो गया है। इससे साफ है कि एजुकेशन सेस सिर्फ वित्त मंत्रालय के कानून के तहत लगे करों पर ही वसूला जाएगा।