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17 साल में 100 गुना बढ़ी जीएम फसलों की खेती

Wed, 20 Feb 2013 10:43 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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जीएम फसलों पर दुनिया भर में छिड़ी बहस के बीच पहली बार विकासशील देशों में जीएम फसलों की खेती विकसित देशों से ज्यादा हो गई है। इस तरह दो दशक से भी कम समय में विश्व में जीएम फसलों का क्षेत्रफल 100 गुना बढ़कर 17 करोड़ हेक्टेयर के पार पहुंच गया है। इंटरनेशनल सर्विस फॉर एक्विजिशन ऑफ एग्रो-बायोटेक एप्लीकेशंस (आईएसएएए) की रिपोर्ट के अनुसार, अगले पांच वर्षों में जीएम खेती का प्रसार विकासशील देशों में तेजी से बढ़ेगा।
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बॉयोटेक उद्योग का समर्थन करने वाली संस्था आईएसएएए हर साल जीएम खेती के प्रसार पर अपनी रिपोर्ट जारी करती है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल जीएम फसलों का क्षेत्रफल वर्ष 2011 की तुलना में करीब 1 करोड़ हेक्टेयर बढ़कर 17 करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा हो गया है।

जीएम फसलों को उगाने वाले किसानों की तादाद भी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है। करीब 1.73 करोड़ किसान इस तरह की खेती कर रहे हैं। एक साल में इनकी संख्या करीब छह लाख बढ़ी है। विकासशील देशों में जीएम फसलों के तेजी से प्रसार के बावजूद अभी भी इसका गढ़ अमेरिका ही है। लेकिन ब्राजील में इसका प्रसार सबसे तेजी से हो रहा है।
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ब्राजील जैसे देशों में जीएम खेती की लोकप्रियता के चलते विकासशील देशों की जीएम खेती में हिस्सेदारी बढ़कर 52 फीसदी हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल भारत में रिकॉर्ड एक करोड़ आठ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में बीटी कॉटन की खेती दर्ज की गई है। विश्व में जीएम फसलों की 41 फीसदी खेती अमेरिका में होती है। लेकिन, गत वर्ष वहां इसके क्षेत्रफल में मामूली वृद्धि हुई है। अमेरिका के बाद जीएम खेती में अर्जेंटीना और कनाडा का स्थान है।

अफ्रीका में बढ़ रही हैं जीएम फसलें
जीएम फसलों को बढ़ावा देने वाली कंपनियों की नजरें अब सूडान और मिस्र जैसे देशों पर हैं। पिछले साल बीटी कॉटन सूडान के रास्ते अफ्रीका पहुंची हैं, जहां 20 हजार हेक्टेयर में इसकी खेती हुई है। इसी तरह, कम्युनिस्ट शासन वाले क्यूबा में भी जीएम फसलों ने पहुंच बना ली है। वहां किसानों ने 3 हजार हेक्टेयर में हाईब्रिड मक्का उगाई है।

यूरोप ने की जीएम फसलों से तौबा
विकासशील देशों में भले ही जीएम फसलों का दायरा बढ़ रहा है, लेकिन इन्हें लेकर यूरोप के देशों का विरोध जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जीएम फसलों के लिए यूरोपीय क्षेत्र खासतौर पर चुनौतीपूर्ण है। वहां सक्रिय जीएम विरोध समूहों के प्रभाव के चलते यूरोप में जीएम फसलों को एंट्री नहीं मिल रही है।

जीएम गन्ने की तैयारी
कपास और मक्का के बाद अब गन्ने में भी जीएम बीज लाने की तैयारियां चल रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, निकट भविष्य में बायोटेक गन्ने के आने की उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा ज्यादा विटामिन वाला चावल और ट्रांस फैट रहित सोयाबीन के बीज भी बाजार में आएंगे।
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