अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक (एमडी) क्रिस्टीन लेगार्डे ने ग्लोबल स्तर पर आर्थिक रिकवरी को धीमा, असंतुलित और अस्थायी बताते हुए इस मामले में भारत के प्रदर्शन की सराहना की है। उन्होंने कहा दुनिया के धुंधले आर्थिक परिदृश्य के बीच भारत चमक कर उभरा है। उन्होंने मोदी सरकार द्वारा बीते माह पेश किए गए आम बजट की भी सराहना करते हुए इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया।
दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज फॉर वुमेन की छात्राओं को संबोधित करते हुए लेगार्डे ने कहा कि आर्थिक सुस्ती के चलते दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीति अपनी राह से फिसली हुई हैं। मौद्रिक स्थिति का अच्छे ढंग से प्रबंधन किए जाने पर भी इन देशों के वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें कम होने और निचले स्तर पर चल रही ब्याज दरों का हवाला देते हुए उन्होंने आने वाले समय में स्थिति बेहतर होने की उम्मीद जताई। हालांकि इसके बावजूद ग्लोबल आर्थिक रिकवरी के प्रति जोखिम बने रहने की आशंका भी जताई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा जून में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी से पहले लेगार्डे की यह चेतावनी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिका में दरें बढ़ने से उभरते हुए बाजारों से पूंजी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। लेगार्डे ने कहा कि ग्लोबल आर्थिक संकट के छह साल बाद इस साल ग्लोबल अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.5 फीसदी और 2016 में 3.7 फीसदी रहने की संभावना है।
लेगार्डे ने कहा कि यूरो क्षेत्र और जापान की आर्थिक स्थिति पिछले दिनों धीमी विकास दर और महंगाई के निचले स्तर के चलते जोखिम की स्थिति में रही है। ऐसे में इन क्षेत्रों में कर्ज और बेरोजगारी में कमी लाना एक मुश्किल काम होगा। दूसरी ओर डॉलर की मजबूती, ग्लोबल स्तर पर ऊंची ब्याज दरों और अस्थिर वित्तीय बाजारों के चलते भारत जैसे उभरते बाजारों वाली अर्थव्यवस्था वाले देश आने वाले दिनों में लाभप्रद स्थिति में रहेंगे। उन्होंने अनुमान जताया कि भारत अपनी समकक्ष अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करेगा।
लेगार्डे ने सरकार की ओर से नीतिगत सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों और कारोबारी भरोसे में मजबूती आने के चलते देश की आर्थिक विकास दर आगामी वित्त वर्ष में 7.5 फीसदी के स्तर पर रहने की उम्मीद जताई। उन्होंने सरकार की बजटीय घोषणाओं, वित्तीय मजबूती और आधारभूत ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के लिए राशि में बढ़ोतरी किए जाने की सराहना की। साथ ही उन्होंने भारत में श्रम सुधारों की पुरजोर वकालत करते हुए बेरोजगारी से निपटने की जरूरत भी जताई।
अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी का जिक्र करते हुए लेगार्डे ने कहा कि भारत में केवल 33 फीसदी महिलाएं ही कामकाजी हैं। यह 50 फीसदी के वैश्विक औसत और पूर्वी एशिया के 63 फीसदी औसत के मुकाबले काफी कम है। उन्होंने कहा कि रोजगार में महिलाओं की भागीदारी न केवल कम है, बल्कि वर्ष 2005 के बाद से इसमें गिरावट भी आती दिख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने की जरूरत है, ताकि महिलाओं को न केवल नौकरियां मिलने में आसानी हो, बल्कि उनकी कार्य दशाओं में भी सुधार हो। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन के काम की सराहना करते हुए लेगार्डे ने कहा कि राजन आईएमएफ के लिए भी मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में काम कर चुके हैं और वह अपने काम में काफी दक्ष हैं।