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अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को कर्ज मिलने की राह कठिन

Tue, 18 Dec 2012 12:43 PM IST
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
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अधूरे पड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को कर्ज देने से सार्वजनिक बैंक कतरा रहे हैं। बैंकर्स के अनुसार ऐसे प्रोजेक्ट्स को कर्ज देने से उनकी गैर निष्पादक परिसम्पत्ति (एनपीए) में और इजाफा हो सकता है। जिसे देखते हुए यदि इन प्रोजेक्ट्स को कर्ज देने में बैंक को एनपीए नियमों में थोड़ी राहत मिले, तो बैंक कर्ज दे सकते हैं।
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वित्त मंत्री पी. चिदंबरम इसके पहले सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के प्रमुखों के साथ दो बार हुई बैठक में यह कह चुके हैं कि बैंकों को अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को कर्ज देने में तेजी लानी चाहिए। जिससे कि अर्थव्यवस्था में तेजी आए।

एक प्रमुख सार्वजनिक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि इस संबंध में हाल ही में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। जिसमें बैंकों ने कहा है कि यदि कोई प्रोजेक्ट अधूरा है, तो ऐसे ज्यादातर मामले में पहले से किसी न किसी बैंक का कर्ज फंसा है। ऐसे में कोई दूसरा बैंक कैसे उस प्रोजेक्ट के लिए कर्ज दे सकता है। बैंक के लिए उसका भी कर्ज फंस सकता है। जिसका असर बढ़े एनपीए के रुप में होगा।
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अधिकारी ने बताया कि बैंकों ने वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से कहा है कि यदि इस तरह के प्रोजेक्ट्स को कर्ज देने में, कर्जदाता बैंक को एनपीए में छूट मिलती है, तो बैंक कर्ज देने में तेजी ला सकते हैं। बैंकों के इस रुख से रियल एस्टेट कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना या फिर कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग कराना आसान नहीं होगा। जिसका सीधा असर मांग और आपूर्ति के समीकरण पर दिखेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2012 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए 4.01 फीसदी तक पहुंच चुका है। चालू वित्त वर्ष में कुल एनपीए दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका है। जबकि, निजी क्षेत्रों के बैंकों का एनपीए बेहतर प्रबंधन से घट रहा है। अधिकारी के अनुसार रिजर्व बैंक भी बैंकों को बार-बार यह कह रहा है कि वह अपने जोखिम वाले कर्ज की वसूली के लिए बेहतर कदम उठाएं। ऐसे में अधूरे प्रोजेक्ट्स को जोखिम लेते हुए कर्ज देना आसान नहीं है।
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