आरबीआई द्वारा पुराने नोट वापस लेने का फैसला भले ही कालेधन पर लगाम कसने के लिए है, पर यह पैसा रीयल एस्टेट में छाई सुस्ती के लिए वरदान भी साबित हो सकता है।
बैंकर और बाजार के जानकारों के मुताबिक साल 2005 से पहले के नोट 31 मार्च तक इस्तेमाल हो सकेंगे।
ऐसे में कालेधन में रखी पूंजी अगले दो से ढाई महीने में रीयल एस्टेट सेक्टर में तेजी से लगने की संभावना है। इसका असर कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में भी दिख सकता है।
1 जुलाई के बाद देना होगा पहचान प्रमाण पत्र
बैंकर्स के अनुसार रिजर्व बैंक ने एक जुलाई के बाद 10 से ज्यादा 500 और 1000 रुपये के नोट बदलने पर पहचान पत्र और निवास स्थान प्रमाण पत्र देने की शर्त लगाई है। यह उन ग्राहकों पर लागू होगी जिनका एक्सचेंज करने वाले बैंक में खाता नहीं है।
इसका सीधा मतलब है कि रिजर्व बैंक को अंदेशा है,कि जो कालाधन अभी तक लोगों के लॉकर, घरों आदि में पड़ा है, वह बाहर आएगा।
इंडियन बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि कालेधन के रूप में रखी पूंजी रीयल एस्टेट सेक्टर में 31 मार्च 2014 तक तेजी से निवेश होने की संभावना है।
अधिकारी के अनुसार कालाधन रखने वाले लोग अगर बैंक जाएंगे, तो उन्हें एक जुलाई से पैनकार्ड आदि विवरण देना जरूरी होगा। यदि वह ऐसा करते हैं, तो वह सीधे तौर पर आयकर विभाग के दायरे में आएंगे। इससे बचने के लिए रीयल एस्टेट एक सुरक्षित तरीका हो सकता है।
नोट छांटने और पहुंचाने की आ सकती है समस्या
बैंकर एसपी सिंह के अनुसार छोटे नोट के साथ-साथ 500 और 1000 रुपये के नोट वापस लेने का कदम निश्चित तौर पर कालेधन को सामने लाने के लिए किया गया है। इसके अलावा पाकिस्तान के तरफ से खास तौर पर जाली नोट के खतरे को देखते हुए भी नोट वापस लेने का कदम रिजर्व बैंक ने उठाया है।
बैंकर्स के अनुसार अप्रैल से नोट बदलने की कवायद शुरू होने के समय, नोट छांटने और उन्हें थोक की मात्रा में पहुंचाने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
इसके तहत भारी मात्रा में नोट को छांटने के लिए प्रणाली विकसित करने जैसी चीजें अगले दो-ढाई महीने में अमल में लाने की तैयारी करनी होगी।
ट्रस्ट में भी बढ़ सकता है निवेश
एसबीआई के एक पूर्व अधिकारी के अनुसार कालेधन को सफेद बनाने के लिए लोग ट्रस्ट के जरिए भी निवेश करेंगे। इसके तहत अचानक कई ट्रस्टों में गुप्त दान की संख्या में इजाफा हो सकता है।
ऐसे ट्रस्टों पर आयकर विभाग की नजर रहेगी। अधिकारी के अनुसार 1977-78 में भी हजार के नोट बाजार से हटाए गए थे।
उस समय लोगों ने नेपाल के जरिए कालेधन को भेजकर पूंजी वापस नेपाल से भारतीय बैंकों में मंगा ली थी।