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गार संशोधनों को दिया गया अंतिम रूप: चिदंबरम

Sun, 18 Nov 2012 11:03 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने रविवार को खुलासा किया कि गार में संशोधनों को अंतिम रूप दे दिया गया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि आयकर कानून के चैप्टर 10ए में संशोधनों को अंतिम रूप दिया गया है। अब यह पीएमओ के पास जाएगा और हम संशोधनों के साथ तैयार होंगे। इसके बाद गार नियमों में संशोधित चैप्टर 10ए प्रतिबिंबित होगा।
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चिदंबरम ने कहा कि इसकी तैयारी चल रही है और काम लगभग पूरा हो गया है। ड्राफ्टिंग का काम पूरा हो चुका है। इसलिए गार नियंत्रण में है। मैं फैसले ले चुका हूं, अब प्रधानमंत्री और उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी ली जानी शेष है। आयकर कानून का चैप्टर 10 ए निवेश के कराधान से संबंधित है।

गार विदेशी निवेश के जरिए कर बचाव के खिलाफ विवादास्पद कानून है। 2012-13 के आम बजट में इसका प्रस्ताव कर चोरी रोकने के लिए किया गया था लेकिन घरेलू और विदेशी निवेशकों ने इसका कड़ा विरोध किया था। निवेशकों को डर है कि इससे टैक्स अधिकारियों को ज्यादा अधिकार मिल जाएंगे, जिससे निवेशकों का उत्पीड़न होगा। आशंकाओं पर विचार करने के लिए सरकार ने टैक्स एक्सपर्ट पार्थसारथी शोम की अध्यक्षता में समिति का गठन किया था।
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इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन में 1.86 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की बात भी मिथक और काल्पनिक साबित होगी। इसमें जिस बड़े नुकसान का जिक्र किया गया है वह भी एक और फैंसी आंकड़ा है। साल में रियायती सिलेंडरों की संख्या बढ़ाने के सवाल पर चिदंबरम ने कहा कि संख्या बढ़ाने के फैसला पर विचार पेट्रोलियम मंत्रालय ही कर सकता है।

यदि पेट्रोलियम मंत्रालय को लगता है कि रियायती सिलेंडरों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है तो वह इस संदर्भ में प्रस्ताव ला सकता है। उन्होंने कहा कि नेशनल निवेश बोर्ड (एनआईबी) के गठन संबंधी प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसका मकसद बड़े प्रोजेक्टों को लागू करने में होने वाली देरी को खत्म करना है।

चिदंबरम ने इस धारणा को खारिज किया कि उनका मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ब्याज दरों और अन्य मुद्दों पर एक दूसरे के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि हम दोनों एक दूसरे के विरोधी नहीं है। केंद्र सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच वैसे ही संबंध हैं जैसे दुनिया के अन्य देशों की सरकारों और केंद्रीय बैंकों के बीच होते हैं।

वित्त मंत्री द्वारा राजकोषीय घाटे का खाका तैयार करने और केंद्रीय बैंक की सरकारी खर्च से जुड़ी चिंता पर गौर करने के बावजूद रिजर्व बैंक ने 30 अक्तूबर को पेश मौद्रिक नीति की छमाही समीक्षा में ब्याज दरें नहीं घटाई थीं।
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