जी-20 के तहत आने वाले विकसित देश भारत सरकार पर दबाव डाल रहे हैं, कि वह समझौते को स्वीकार करे। उनकी दलील है कि समझौते को स्वीकार करने से विश्व अर्थव्यवस्था को 120 अरब डॉलर का सालाना लाभ पहुंचेगा, साथ ही करीब 1.60 करोड़ नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। जिसका बड़ा फायदा भारत को मिलेगा।नवंबर में ऑस्ट्रेलिया में होने वाली जी-20 की शिखर बैठक के शेरपा की हैसियत से भारत आई हीथर स्मिथ ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा है कि हम खाद्य सुरक्षा कानून और सब्सिडी पर भारत की चिंताओं को समझते हैं, लेकिन विश्व भारत से बड़ी भूमिका की उम्मीद करता है।
भारत से उम्मीद है कि वह टीएफए को स्वीकार कर उसके फायदे से दुनिया को वंचित नहीं करेगा। स्मिथ ने ऑस्ट्रेलियाई उच्च आयोग के एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही है। उनके अनुसार जी-20 देशों के कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें हल करने की जरूरत है। जिसके तहत कर मुद्दों से लेकर, कारोबार करने के तरीकों को आसान करने जैसे मामले अहम हैं। उनके अनुसार यदि हम इन मुद्दों को हल करते हैं, तो बड़े पैमाने रोजगार के अवसर के साथ-साथ, छोटे कारोबारियों को ग्लोबल बाजार मिल सकेगा।
मोदी सरकार द्वारा टीएफए समझौते को अस्वीकार करने के बाद से ही उस पर विकसित देशों के तरफ से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। वहीं भारत और विकासशील देशों को इस बात का डर है कि यदि वह समझौते को स्वीकार करती है, तो उसके लिए खाद्य सुरक्षा कानून और उस जैसी योजनाओं को लागू करना उनके लिए संभव नहीं हो पाएगा। ऐसे में नवंबर में होने वाले जी-20 सम्मेलन में भी इन्ही मुद्दों पर प्रमुख रुप से जोर रहेगा।