अब देश में विदेशी बैंक भी भारतीय बैंकों की तरह कारोबार कर सकेंगे। हालांकि उसके लिए उन्हें मौजूदा शाखा मॉडल की जगह पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई के रूप में लाइसेंस लेना होगा। अभी तक विदेशी बैंक भारत में शाखा के आधार पर लाइसेंस ले सकते हैं।
बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में विदेशी बैंकों के लिए कारोबार शुरू करने के संबंध में अपनी रूपरेखा जारी करते हुए कहा है कि पूर्ण स्वामित्व के साथ विदेशी बैंक भारत में कारोबार शुरू कर सकेंगे।
रिजर्व बैंक ने कहा है कि भारत में वही नए बैंक कारोबार शुरू कर सकते हैं, जो कि पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई के रूप में आएंगे। रिजर्व बैंक ने भारत में साल 2010 के पहले से कारोबार कर रहे विदेशी बैंकों को कहा है कि वह अपने कारोबार को शाखा मॉडल के आधार पर चला सकेंगे। हालांकि उन्हें भी अपने आप को पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई के रूप में परिवर्तित करने का विकल्प मिलेगा।
रिजर्व बैंक के अनुसार नए विदेशी बैंकों को भारत में कम से कम 500 करोड़ रुपये की चुकता पूंजी के साथ कारोबार शुरू करना होगा। इसी तरह से देश में पहले से कार्यरत विदेशी बैंकों की शाखाओं को पूर्ण स्वामित्व में बदलने के लिए 500 करोड़ रुपये का न्यूनतम नेटवर्थ रखना होगा।
रिजर्व बैंक ने इसके अलावा देश में विदेशी बैंकों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए यह भी व्यवस्था की है, इसके तहत सभी प्रकार के विदेशी बैंकों की पूंजी देश में कुल बैंकिंग प्रणाली के 20 फीसदी से ज्यादा नहीं होगी। देश में कार्यरत बैंकों की तरह ही विदेशी बैंकों के लिए भी प्राथमिकता क्षेत्र की सीमा 40 फीसदी होगी।
यह सीमा उन विदेशी बैंकों पर लागू होगी, जो कि पूर्ण स्वामित्व के आधार पर काम करेंगे। यदि कोई विदेशी बैंक अपनी हिस्सेदारी को एफडीआई नीति के अनुसार कम करना चाहेगा, तो उसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध करना जरूरी होगा।