देश का फुटवियर उद्योग एक ओर विदेशों से फैशनेबल जूते-चप्पलों के बढ़ते आयात की मार झेल रहा है, दूसरी ओर विदेशी बाजारों में भारतीय फुटवियर की घटती जा रही मांग भी इसे चोट दे रही है।
औद्योगिक संगठन एसोचैम के एक सर्वे के मुताबिक महिला, पुरुष व बच्चों के जूते-चप्पलों के साथ-साथ स्पोर्ट्स फुटवियर के घरेलू बाजार पर भी आयातित माल का कब्जा तेजी से बढ़ता जा रहा है।
सर्वे के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में देश में फुटवियर का आयात 133 फीसदी बढ़ गया है। बाजार के इस विशाल आकार के बावजूद फुटवियर उद्योग में अबतक केवल 500 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हुआ है, जोकि इस उद्योग के कुल आकार का महज 0.65 फीसदी है। ऐसे हालात में घरेलू उत्पादकों के लिए कारोबार मुश्किल होता जा रहा है।
एसोचैम ने अपने अध्ययन में बताया है कि बीते पांच वर्षों में फुटवियर का आयात 132.67 फीसदी बढ़ा है, जिसमें अकेले चीन से होने वाले आयात में 63 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
देश के फुटवियर बाजार में इस समय असंगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी की है और इसमें लगभग 18 लाख लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिला हुआ है।
दूसरी ओर संगठित क्षेत्र के पास 30 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है और इसमें करीब 8 लाख लोग कार्यरत हैं। समूचे फुटवियर उद्योग में अप्रत्यक्ष तौर पर 20 लाख से भी अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने बताया कि भारतीय फुटवियर निर्यात वर्ष 2001-02 से 2012-13 के बीच 3.87 अरब रुपये (6.39 करोड़ डॉलर) से तकरीबन तिगुनी बढ़ोतरी के साथ 11.87 अरब रुपये (19.58 करोड़ डॉलर) सालाना के स्तर पर पहुंच गया है।
इसके 2015 तक 15.16 अरब डॉलर (25 करोड़ डॉलर) तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत से निर्यात होने वाले फुटवियर में करीब 75 फीसदी पुरुषों के जूते-चप्पल होते हैं, जबकि महिलाओं, बच्चों और स्पोर्ट्स फुटवियर 25 की हिस्सेदारी फीसदी होते हैं।
सबसे ज्यादा फुटवियर निर्यात ब्रिटेन, जर्मनी, अमेरिका को किया जाता है। दूसरी ओर देश में फुटवियर का सबसे ज्यादा आयात चीन, वियतनाम और इटली से होता है। चीन द्वारा कम कीमतों पर फुटवियर की व्यापक रेंज के आयात से घरेलू फुटवियर उद्योग के सामने तगड़ी चुनौती खड़ी हो रही है।
बीते पांच वर्षों में चीन से फुटवियर का आयात 295 फीसदी बढ़ा है, जबकि अमेरिका से आयात में कमी आई है।