फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारी खजाने को किस हाल में छोड़ गए चिदंबरम

Tue, 01 Jul 2014 08:47 AM IST
अजीत सिंह / अमर उजाला दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
अर्थव्यवस्था को सुस्ती से उबारने की कोशिशों पर बढ़ता वित्तीय घाटा भारी पड़ सकता है। वित्त वर्ष 2014-15 के शुरुआती दो महीनों में देश का वित्तीय घाटा 40 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पूरे साल के अनुमान का 45.6 फीसदी है। पिछले साल इसी अवधि में वित्तीय घाटा 33 फीसदी तक पहुंचा था। यानी मोदी सरकार को यूपीए से विरासत में मिला सरकारी खजाना घाटे के बोझ से बुरी तरह दबा है।
विज्ञापन


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गत अप्रैल और मई के दौरान वित्तीय घाटा 2.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अंतरिम बजट में यूपीए सरकार ने वित्तीय घाटे को जीडीपी के 4.1 फीसदी के भीतर रखने का दावा किया था। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए वित्तीय घाटे को काबू में रखना मुश्किल लग रहा है। वित्त वर्ष 2013-14 के पहले दो महीनों में वित्तीय घाटा 1.8 लाख करोड़ रुपये रहा था।

वित्तीय घाटे के अलावा राजस्व घाटा भी सरकार की मुसीबत बना हुआ है। सालाना आधार पर मई में वित्तीय घाटा 87,100 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी अवधि में राजस्व घाटा भी 58,300 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.04 लाख करोड़ रुपये रहा। एक ओर सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ता जा रहा है, जबकि राजस्व बढ़ोतरी के मामले में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं हुई है। गत अप्रैल-मई में टैक्स के जरिए सरकार की आमदनी 77,800 करोड़ रुपये से बढ़कर 84,500 करोड़ रुपये तक पहुंची है।
विज्ञापन
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें