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अमेरिकी बैंक पर 80 हजार करोड़ रुपए का जुर्माना

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अमेरिका में बैंकिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी जेपी मॉर्गन पर रिकॉर्ड स्तर पर लगभग 80 हज़ार करोड़ रुपए (13 अरब डॉलर) का जुर्माना लगा है।
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अमेरिकी मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़ गिरवी के आधार वाली प्रतिभूतियों के मामले की जांच के बाद जेपी मॉर्गन पर जुर्माना लगाया गया है।

अमेरिकी न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के बाद इस पर सहमति बनी।

कंपनी पर ज्यादा मूल्य वाली गिरवी आधारित प्रतिभूतियों की बिक्री का आरोप लगा था जिसके चलते ऐसा माना जाता है कि वर्ष 2007 में बैंकिंग तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त होने की कगार पर पहुंच गया।

पिछले महीने, 'लंदन व्हेल' घोटाला मामले में जेपी मॉर्गन पर क़रीब 61 अरब रुपये का जुर्माना लगा था।

पूर्व बैंक कर्मचारी ब्रूनो इकसिल ने वित्त बाजार पर बड़ा दांव लगाते हुए ऐसी ख़रीद-फ़रोख़्त की जिससे ऐसे घोटाले की स्थिति बन गई।

जोखिमपूर्ण संपत्ति

वॉलस्ट्रीट जर्नल ने इस फैसले से अवगत अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा कि जेपी मॉर्गन को जुर्माने की यह भारी रकम चुकानी होगी।

शुक्रवार को जेपी मॉर्गन के वकीलों और अमेरिका के अटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर तथा उनके सहयोगी टोनी वेस्ट के बीच हुई बातचीत के बाद न्याय विभाग ने ऐसा फ़ैसला किया।
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न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी यह ख़बर दी है कि यह निवेश बैंक भी इस पर लगभग सहमति देने के कगार पर पहुंच रहा था लेकिन इसके अंतिम ब्योरे पर अब भी चर्चा की जा रही है।
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इस पर न्याय विभाग और न ही बैंक ने कोई टिप्पणी की है।

अगर इस बात की पुष्टि हो जाती है तो यह किसी अमेरिकी कंपनी द्वारा सेटेलमेंट के तौर पर चुकाई गई सबसे बड़ी रकम होगी।

पर क़रीब 7 खरब 95 अरब रुपए की जुर्माने की इस रक़म में 5 ख़रब 51 अरब रुपए बतौर जुर्माना शामिल है जबकि 2 ख़रब 44 अरब रुपए की राशि संघर्ष कर रहे घर के मालिकों को राहत देने के लिए दी जाएगी।

वित्तीय संकट के दौर में कई निवेश बैंकों ने बाजार में गिरवी आधारित प्रतिभूतियों की पेशकश की थी।
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