हाल ही में सिंडिकेट बैंक के तत्कालीन सीएमडी एसके जैन के घूस लेते पकड़े जाने के बाद वित्त मंत्रालय अब हरकत में आ गया है। मंत्रालय की अब सभी सरकारी बैंकों पर नजर है। इसी के मद्देनजर जल्द ही सभी बैंकों को एक एडवाइजरी जारी की जाएगी।
साथ ही मंत्रालय बैंकों के लिए दिशानिर्देश भी जारी करने की तैयारी में हैं, जिसमें उनके कामकाज के तरीकों को ज्यादा पारदर्शी बनाया जाएगा। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि सिंडिकेट बैंक के मामले के बाद यह जरूरत महसूस की जा रही है कि बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों की ज्यादा जवाबदेही तय की जाए। इसके तहत कर्ज की स्वीकृति देनेवाली समिति को भी जवाबदेह बनाया जाएगा।
आरबीआई ने अपने स्तर पर जांच शुरू को कहा
साथ ही कर्ज देने की पूरी प्रक्रिया को कहीं ज्यादा पारदर्शी और एक तय समय में पूरा किए जाने की जरूरत है। अधिकारी के अनुसार इन सब मुददों को लेकर मंत्रालय जल्द ही एडवाइजरी जारी करेगा।
मंगलवार को हुई बैठक में इस बात पर मोटे तौर पर सहमति बन गई है। मंगलवार को पेश हुई मौद्रिक नीति में आरबीआई ने भी अपने स्तर पर सिंडिकेट मामले की जांच शुरू करने की बाद कही है।
सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार बैंकों को ज्यादा पेशेवर बनाने की जरूरत है। उनके कामकाज में सरकार का दखल कम होना चाहिए।
2.5 लाख करोड़ रुपए का हुआ एनपीए
नायक समिति ने भी ऐसी ही सिफारिश कर रखी है। नई सरकार इस दिशा में कदम उठाने की भी बात कह चुकी है। ऐसे में इन मुद्दों को जल्द हल करने की जरूरत है।
वित्त मंत्रालय बैंकों में नियुक्त चीफ विजिलेंस ऑफिसर की भूमिका को भी ज्यादा मजबूत करने की तैयारी में हैं। पिछले दो-तीन साल से छाई सुस्ती के कारण बैंकों की गैर निष्पादित संपत्तियां (एनपीए) 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा तक पहुंच चुकी है।
यहीं नहीं, कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग (सीडीआर) जून 2014 तक 3.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। इसे देखते हुए वित्त मंत्रालय आने वाले दिनों में सिंडिकेट घूस मामले को देखते हुए सीडीआर के तहत हुई कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग की समीक्षा भी करने को भी बैंकों को निर्देश दे सकता है।