मोदी सरकार आगामी बजट में पेंशन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए कई अहम कदम उठाने की तैयारी में हैं। इसके तहत आम लोगों को पेंशन उत्पादों में निवेश करने पर टैक्स छूट पाने का एक अलग विकल्प देने की योजना है।
यानी, टैक्स बचाने के लिए करदाता को एक लाख रुपये से ज्यादा का निवेश करने का मौका मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार जीवन बीमा क्षेत्र में सुधार के लिए किस तरह के कदम उठाए जा सकते हैं।
इसके लिए हाल ही में वित्तीय सेवा मामले के सचिव जीएस संधू ने जीवन बीमा क्षेत्र के प्रमुखों से बातचीत की है।
ज्यादा रुपए के निवेश की मांग
बैठक में एलआईसी काउंसिल के अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम, बजाज आलियांज के वरिष्ठ अधिकारी के अलावा दूसरी प्रमुख कंपनियों के अधिकारी शामिल थे।
सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय इस बात पर सहमत है कि पेंशन क्षेत्र को आकर्षक बनाने की जरूरत है। इसके लिए यह जरूरी है कि टैक्स बचाने के लिए मौजूदा सीमा में बदलाव किया जाए।
यानी, एक लाख रुपये निवेश पर टैक्स छूट पाने की सीमा को बढ़ाया जाए। इस सीमा को 1.50 लाख रुपये तक किया जा सकता है। जिसमें पेंशन क्षेत्र में निवेश के लिए अलग वर्ग बन सकता है।
वित्त मंत्रालय का मानना है कि पेंशन क्षेत्र को अतिरिक्त तरजीह देने से जहां सोशल सिक्योरिटी को बढ़ावा मिलेगा, वहीं लंबी अवधि के लिए पूंजी जुटाना भी कंपनियों के लिए आसान होगा। जिस पूंजी को जीवन बीमा कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश कर सकेंगी।
पेंशन उत्पादों पर कंपनियों का जोर नहीं
जीवन बीमा क्षेत्र की एक कंपनी के अधिकारी ने बताया कि इरडा के नए नियम के तहत कंपनियों को पेंशन उत्पादों पर रिटर्न की न्यूनतम गारंटी देने की बात कही गई है।
चूंकि, पेंशन क्षेत्र में लंबी अवधि का निवेश होता है, ऐसे में कंपनियों के लिए न्यूनतम गारंटी देना आसान नहीं है। इस वजह से बाजार में कंपनियां पेंशन उत्पादों की बिक्री में बहुत जोर नहीं लगा रही हैं। साथ ही नए उत्पाद फाइल करने भी रुचि कम रख रही हैं।