बैंकों के लिए कर्ज वसूलना आसान हो सकेगा। जो ग्राहक बैंकों के कर्ज को जानबूझकर नहीं चुका रहे हैं, उनसे कर्ज वसूलने के लिए बैंक अब ज्यादा सख्ती बरत सकेंगे। इसके लिए सोमवार को लोकसभा ने द इनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट एंड रिकवरी ऑफ डेट लॉ (संशोधन) बिल 2011 को विपक्ष के विरोध के बावजूद मंजूरी दे दी। बिल का भाजपा, वामदल सहित दूसरी पार्टियां विरोध कर रही हैं। विपक्षी दल बिल को स्थायी समिति के पास भेजने की मांग कर रहे थे। सोमवार को लोकसभा ने बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया है।
बिल के तहत यह प्रावधान किया गया है कि बैंक कंपनियों द्वारा कर्ज न चुकाने पर कर्ज की राशि के बराबर हिस्से को शेयर के रूप में एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी के जरिये परिवर्तित कर सकेंगे। इसके पहले, बिल को दिसंबर 2011 में लोकसभा में पेश किया गया था। बिल के कानून बनने के बाद यह 10 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर डिफॉल्ट करने की स्थिति में लागू होगा। सोमवार को ही विपक्ष के भारी विरोध की वजह से बैंकिंग संशोधन बिल सदन में पेश नहीं किया जा सका।