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केवल एफडीआई की मंजूरी से नहीं सुधरेगा विमानन उद्योग

Tue, 25 Dec 2012 08:23 PM IST
जेनेवा/एजेंसी
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भारत में जब तक विमान सेवाओं के भारी-भरकम खर्च को घटाने के कारगर कदम नहीं उठाए जाएंगे, तक तक विदेशी विमानन कंपनियां घरेलू एयरलाइंस में निवेश व हिस्सेदारी की खरीद के लिए आगे नहीं आएंगी। वित्तीय संकट से जूझते देश के विमानन उद्योग के बारे में यह राय अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन कंपनियों के संगठन इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आइटा) ने व्यक्त की है।
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सरकार द्वारा विदेशी विमानन कंपनियों के लिए  देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की शर्तों को उदार करते हुए उन्हें घरेलू एयरलाइंस में 49 फीसदी तक की हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दिए जाने के बारे में आइटा की भारतीय इकाई के प्रमुख टोनी टेलर ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि विदेशी एयरलाइंस को घरेलू एयलाइन कंपनियों में निवेश की अनुमति दे देना भर विमानन उद्योग को संकट से उबारने के लिए पर्याप्त है।

यह एक अच्छा कदम है, पर केवल इसके सहारे भारतीय विमानन उद्योग की परेशानियों को खत्म नहीं किया जा सकता। यह सही दिशा में उठाया गया एक कदम तो हो सकता है, पर यह कोई राम बाण नहीं, जैसा कि कुछ लोगों को लगता है। उन्होंने कहा कि करों की ऊंची दरों के चलते एयरपोर्ट संबंधी खर्च काफी अधिक हैं। इसके चलते विमानन कंपनियों की संचालन लागत काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा देश में एयर नेविगेशन सेवा की खराब हालत भी एक समस्या है।
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उन्होंने कहा कि उदारीकरण की दिशा में उठाया गया कोई भी कदम प्रशंसनीय है, पर जब तक देश में एयरलाइन उद्योग के हाताल में सुधार नहीं किया जाता, तब तक यह उम्मीद करना बेमानी है कि महज एफडीआई की इजाजत दे देने से देश में विदेशी एयरलाइंस की बाढ़ आ जाएगी। विदेशी निवेश उसी हालत में आएगा, जबकि कंपनियों को भारत में भी अन्य देशों की तरह ही अच्छे रिटर्न मिलने के आसार नजर आएंगे। इसके अलावा केवल विदेशी पूंजी के सहारे सबकुछ ठीक नहीं हो सकता।

यदि देश में एयरलाइंस का संचालन करना एक घाटे का सौदा साबित हो रहा है, तो पहले इसका हल निकालने हुए उद्योग को पुनर्गठित (रीस्ट्रक्चर) करने की जरूरत है। टेलर ने दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों पर विमानन कंपनियों से वसूले जा रही भारी-भरकम एयरपोर्ट डेवलपमेंट फीस (एडीएफ) को जनवरी से खत्म करने के सरकार के कदम की सराहना करते हुए कहा कि आइटा ने पहले ही इसपर चिंता जताते हुए कहा था कि शुल्क में बढ़ोतरी से राजस्व में गिरावट आ जाएगी।
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