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डिफेंस में एफडीआई बढ़ाने की तैयारी शुरू

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केंद्र में मोदी सरकार की ताजपोशी से पहले ही वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने डिफेंस में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का रास्ता खोलने की तैयारी शुरू कर दी है।
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रक्षा से जुड़ी तकनीक के मामले में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए लंबे समय से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की वकालत की जा रही है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने इस मुद्दे पर सक्रियता दिखाते हुए नई सरकार के लिए एक कैबिनेट नोट तैयार किया है, जिसमे डिफेंस सेक्टर में 74 फीसदी एफडीआई की सिफारिश की गई है।

डिफेंस सेक्टर में विदेशी निवेश को लेकर है विवाद

रिटेल, एविएशन और टेलकॉम जैसे कई क्षेत्रों में एफडीआई को बढ़ावा देने वाली यूपीए सरकार के भीतर डिफेंस में एफडीआई को लेकर काफी मतभेद रहे। जिसके चलते यह मामला आगे नहीं बढ़ पाया।

केंद्र में पूर्ण बहुमत के साथ आ रही सरकार की मंशा को भांपते हुए औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने डिफेंस में एफडीआई की सीमा बढ़ाकर 74 फीसदी करने का सुझाव दिया है।

रक्षा समिति से मंजूरी लेनी जरूरी

डीआईपीपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विभाग ने ऑटोमैटिक रूट से 49 फीसदी एफडीआई और एफआईपीबी की मंजूरी के बाद 74 फीसदी एफडीआई की छूट देने का प्रस्ताव तैयार किया है।

डिफेंस से जुड़े क्षेत्रों में अभी 26 फीसदी एफडीआई लाने की अनुमति है। इससे ज्यादा एफडीआई के प्रस्ताव पर रक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी लेनी पड़ती है।

डिफेंस मामलों के विशेषज्ञ डॉ. विवेक लाल का कहना है भारत और अमेरिका रक्षा संबंधी भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। यह मकसद डिफेंस में एफडीआई की सीमा बढ़ने के जरिए ही पूरा हो सकता है।

भारत के सामने अपने सुरक्षा बलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए औद्योगिक ढ़ांचा खड़ा करने का बड़ा मौका है।
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विश्व का प्रमुख डिफेंस इंपोर्टर है भारत

भारत रक्षा संबंधी सामानों का सबसे ज्यादा आयात करने वाले देशों में शामिल है। रक्षा खर्च के मामले में भी भारत विश्व के टॉप 10 देशों में एक है।

भारी-भरकम रक्षा बजट होने के बावजूद भारत में डिफेंस से जुड़ी मैन्यूफैक्चरिंग आर्डिनेंस फैक्ट्रियों तक सीमित है।

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