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कारोबार जगत को एफडीआई और पीपीपी की खुराक

Thu, 10 Jul 2014 11:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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मंत्री अरुण जेटली ने उद्योग जगत को आम बजट में लंबित पड़े टैक्स मामलों पर स्पष्टता देकर राहत प्रदान की है। ट्रांसफर प्राइसिंग और रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स को आगे न लगाने की बात कह कर वित्त मंत्री ने उद्योग जगत को बड़ी राहत दी है। इसके अलावा बीमा और रक्षा क्षेत्र में एफडीआई सीमा बढ़ाने का कदम भी पूंजी की कमी से जूझ रही इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद साबित होगा।
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इसके साथ ही पीपीपी मॉडल पर भरोसा जताना उद्योग जगत के लिए अहम साबित हो सकता है। टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज के सीईओ और एमडी एन.चंद्रशेखर का कहना है कि बजट में लंबे समय से जारी मुद्दों जैसे ट्रांसफर प्राइसिंग को हल करने की कोशिश की गई है। साथ ही आगे भी विवादों को न्यूनतम रखने की बात कही गई है। कुल मिलाकर सरकार सीधे रिफार्म की तैयारी में है, जो कि अच्छा कदम है।

बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी निवेश की अनुमति
लंबे समय से बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी एफडीआई लाने की मांग को सरकार ने मान लिया है। साथ ही उसने कहा है कि इस संबंध में संसद में लंबित बीमा विधेयक को जल्द मंजूर कराया जाएगा। इस कदम से कारोबार में सुस्ती झेल रही बीमा कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना आसान हो जाएगा।
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बैंकों को मिलेगी पूंजी
सरकार ने बेसल-3 मानकों के तहत बैंकों को पूंजी जुटाने के लिए उसमें अपनी हिस्सेदारी कम करने की बात कही है। हालांकि सरकारी बैंकों में अधिकतम हिस्सेदारी सरकार रखेगी। इसके अलावा सभी तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए 15 अगस्त को सरकार एक नई स्कीम भी लांच करेगी। आरबीआई छोटे बैंकों के लिए लाइसेंस भी जल्द जारी करेगा।

छोटे कारोबारियों का बढ़ेगा दायरा
वित्त मंत्री ने छोटे कारोबारियों की परिभाषा बदलने की बात बजट में कही है, इससे एमएसएमई क्षेत्र के तहत ज्यादा से ज्यादा कारोबारी आ सकेंगे। क्षेत्र के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के वेंचर कैपिटल फंड बनाने का प्रस्ताव किया गया है।

बरेली, लखनऊ, वाराणसी में टेक्सटाइल क्लस्टर
बरेली, लखनऊ, वाराणसी ,सूरत, कच्छ, भागलपुर और मैसूर में टेक्सटाइल क्लस्टर बनाए जाएंगे। इसके लिए 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसके अलावा 100 करोड़ रुपये की लागत से इंडस्ट्रियल कॉरिडोर अथॉरिटी बनाने की भी बात की गई है।
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