कृषि वैज्ञानिकों की विकसित अति उन्नत पूसा बासमती 1509 किसानों की खुशहाली का जरिया बन गया है। सीमित कीटनाशकों के उपयोग से कम समय में ज्यादा पैदावार करने वाली यह किस्म घरेलू व वैश्विक स्तर पर उपलब्ध बासमती की किस्मों में सर्वाधिक उन्नत है। स्वाद, सुगंध और बेहतरीन आकार के चलते पूसा बासमती 1509 घरेलू व वैश्विक खरीदारों की पहली पसंद बन गया है। किसान भी परंपरागत बासमती के बजाए अब पूसा 1509 की खेती करके मालामाल हो रहे हैं।
आईएआरआई (जेनेटिक डिवीजन) के प्रमुख डॉ के. वी. प्रभु ने बताया कि पूसा बासमती 1121 के मुकाबले बासमती 1509 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नई किस्म जल्द तैयार होने के साथ ही ज्यादा पैदावार देने में सक्षम है। पूसा 1121 जहां 145 से 155 दिनों में तैयार होती है वहीं पूसा 1509 को तैयार होने में सिर्फ 120 से 125 दिन का समय ही लगता है। इसके साथ ही प्रति हेक्टेयर उत्पादन लगभग 6.5 टन है जो पूसा 1121 के मुकाबले लगभग दो टन अधिक है। प्रभु के मुताबिक नवीनतम किस्म को कीटनाशकों की जरूरत कम ही पड़ती है। इसी के चलते घरेलू बासमती निर्यात में इन दोनों किस्मों की हिस्सेदारी 70 फीसदी तक पहुंच गई है।
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया के मुताबिक पूसा बासमती 1509 की वैश्विक मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। स्वाद, सुगंध और इसका बेहतरीन आकार विदेशी खरीदारों को काफी पसंद आ रहा है। बासमती की नई किस्मों के चलते ही निर्यात में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2006-07 में बासमती का निर्यात जहां 2700 करोड़ रुपये था, वह 2011-12 में बढ़कर 16000 करोड़ रुपये के पार हो गया है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों में नई बासमती किस्म तेजी से लोकप्रिय हो रही है।